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बवाल-ए-जान न बन जाए अवैध मिट्टी व बालू का खनन

Sun, 27 Mar 2016 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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pratapgarh
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जनपद में अवैध रूप से मिट्टी का खनन धड़ल्ले के साथ हो रहा है। शासन के स्पष्ट आदेश के बाद भी खेत की उपजाऊ मिट्टी व सई नदी की बालू का खनन कर लोग मालामाल हो रहे हैं। प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के कारण अफसर भी ऐसे लोगों पर हाथ डालने से कतराते हैं। अवैध खनन करने वालों को लोगों की जान की परवाह भी नहीं है। जिससे हादसे की प्रबल आशंका बनी हुई है।
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जनपद में अवैध रूप से खेत की उपजाऊ मिट्टी का अवैध खनन प्रतिबंध के बाद भी जारी है। जेसीबी से खुदाई पर प्रतिबंध भले ही लगाया गया है, लेकिन चोरी-चुपके रात में मिट्टी का खनन किया जा रहा है। ग्रामीण अंचल पर भले ही अधिकारियों की नजर न पड़ती हो, लेकिन शहर के करीब गांवों में अवैध खनन लोगों की जान लेने पर उतारू है। सदर तहसील क्षेत्र के अचलपुर, जिरियामऊ, कादीपुर, खजुरनी, भंगवा, पूरे पांडेय, जोगापुर, पूरे ईश्वरनाथ, रंजीतपुर चिलबिला, महुली में हर दिन सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर सई की बालू व खेत की उपजाऊ मिट्टी लादकर शहर के निर्माणाधीन मकान में गिराते रहते हैं। हर ट्राली के पीछे पांच सौ से लेकर आठ सौ रुपये भी लेते हैं।

इंटरलाकिंग में सई की बालू का प्रयोग होता है। इसके लिए एक हजार रुपये ट्रैक्टर स्वामी लेते हैं। इन गांवों के करीब से गुजरी सई नदी के किनारे से बालू खोदकर लाई जाती है। हद तो यह हो गई है अवैध खनन करने वालों ने भंगवा गांव से गुजरी 33 हजार केवीए की लाइन के लगाए गए पोल के इर्द गिर्द मिट्टी खोदकर बेच डाली। कमाई के लालच में अवैध खनन करने वाले ने यह भी नहीं सोचा कि पोल गिरने से कई लोगों की जान भी जा सकती है। आधा दर्जन से अधिक पोल से गांव के लोगों को खतरा बना हुआ है। यदि पोल गिरने से तार टूटकर गिरेगा तो किसानों के साथ ही राहगीरों व चरवाहों की जान भी जा सकती है। जो प्रशासन के लिए बवाले जान बन सकता है। यदि अवैध खनन पर रोक न लगाई गई तो जल्द ही गांव के लोगों के सामने समस्या पैदा हो सकती है।
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