पुलिस के मुताबिक हमीरपुर के सनेडी निवासी देशराज (35) पिछले तीन सालों से बागवानियां के पास नालका गांव में किराये के मकान में रहता था। देशराज यहां पर अकेले रहता था तथा उसकी पत्नी और एक बच्ची भी है जो उसके गांव में रहती है। दिन में जूते का कारोबार करने के अलावा वह सुबह शाम कबाड़ का कार्य भी करता था। नालका गांव में मिला था शव- 5 मार्च को कुछ लोगों ने देशराज का शव नालका गांव के जाने वाले रास्ते से कुछ दूर खेत में पड़ा देखा। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची ओर शव को कब्जे में लिया। सनेड़ पंचायत के प्रधान धरेंद्र सिंह ने बताया कि देशराज 2 मार्च से लापता था। हर रोज बागवानियां अपने काम पर आता था। लेकिन जब दो दिन से नहीं दिखाई दिया तो उसके परिचित लोगों ने उसकी खोजबीन की जिस पर उन्हें इसका शव खेतों में मिला। पंचायत प्रधान ने बताया कि मृतक व्यक्ति शराब पीने का भी आदी था।
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मानिकपुर थाने पर हमले में छह नहीं बल्कि सात लोग शामिल थे। इसका खुलासा चौथे आरोपी प्रदीप की गिरफ्तारी से हुआ है। पुलिस कितनी तेजी से तथ्यों तक पहुंचती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। मानिकपुर थाने पर 24 फरवरी को कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। इस दौरान जमकर फायरिंग के साथ ही थाने पर बम भी फेंके गए थे। इसके चलते संतरी महादेव मिश्रा की मौत हो गई थी। एसओ ने मामले में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तीसरे दिन तीसरा आरोपी जुबैर भी गिरफ्तार हो गया। इसके बाद पुलिस को उनसे पूछताछ का काफी मौका मिला। आरोपियों को पूछताछ के लिए रिमांड पर भी लिया गया, लेकिन बात यही सामने आई कि दो बाइकों से ही आए छह लोगों ने थाने पर हमला किया था। रविवार को एसटीएफ के हत्थे चौथा आरोपी चढ़ गया। एसटीएफ की पूछताछ में प्रदीप ने बताया कि उनके साथ एक सातवां आरोपी भी था जिसका नाम विपिन है। वह गिरोह के लिए रेकी का काम करता था। वह दूसरी बाइक से आया था और उन लोगों के साथ ही निकल गया था। अब सवाल उठता है कि पुलिस ने आरोपियों से क्या पूछताछ की, जिसमें सिर्फ दर्ज मुकदमे में शामिल लोगों के ही नाम सामने आए। फिलहाल, इस गिरोह का नेटवर्क तो बड़ा है जो प्रतिदिन नए-नए खुलासे कर रहा है।