प्रतापगढ़। स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से जिले में कई अवैध नर्सिंगहोम भी संचालित हो रहे हैं। कुछ ऐसे नर्सिंगहोम भी है जिनका फर्जीवाड़ा कर लाइसेंस लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, जिले में सिर्फ 32 निजी अस्पतालों को लाइसेंस दिया गया है, जबकि सौ से अधिक संचालित हो रहे हैं।
कुछ ऐसे अस्पताल संचालक हैं जिन्होंने गैर जनपद के डाक्टरों डिग्री के आधार पर अस्पताल का पंजीकरण करा लिया है। खुद आयुर्वे का डाक्टर होेने के बाद भी मरीजों का इलाज और आपरेशन तक कर रहे हैं। बेहोशी के डॉक्टर कहां से आते हैं, इसके बारे में लाइसेंस जारी करने वाले सीएमओ तो दूर अस्पताल संचालक को भी नहीं पता है। मगर इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है।
जनपद में महज 32 नर्सिंगहोम और प्राइवेट अस्पतालों का पंजीकरण सीएमओ आफिस में हुआ है। मगर शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक देखा जाए तो सौ से अधिक निजी अस्पताल जिले में संचालित हो रहे हैं। इतना ही नहीं नर्सिंगहोम संचालकों ने सरकारी अस्पतालों को भी हाईजैक कर रखा है। दलाल के साथ आशा बहुओं को कमीशन देकर सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बहकाकर अपने अस्पताल में बुला लेते हैं।
फिर उनसे मनमाफिक वसूली करते हैं। जबकि सीएमओ आफिस से पंजीकृत ज्यादातर नर्सिंगहोम में बेहोशी के डॉक्टर नहीं हैं। शहर से लेकर गांव तक कुछ नामीगिरामी नर्सिंगहोम को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर अस्पतालों में सर्जन, फिजीशियन, बाल रोग विशेषज्ञ तो दूर फार्मासिस्ट और नर्स की तैनाती नहीं है। इसके बाद भी उनका हर साल रिन्यूवल कर दिया जाता है।