अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राव वीरेंद्र सिंह को तहसीलदार से मारपीट करने के आरोप में जेल भेजने पर अधिवक्ताआें का आक्रोश फूट पड़ा। बुधवार को लालगंज में अधिवक्ताओं का हुजूम लखनऊ -वाराणसी हाईवे पर पहुंचा और जाम लगा दिया। जाम लगने से दोनाें ओर वाहनाें की कतार लग गई। जाम लगाकर अधिवक्ताआें ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची और समझा बुझाकर जाम हटवाया।
जाम हटाने के बाद अधिवक्ताओं का हुजूम नारेबाजी करते हुए सीओ दफ्तर पहुंचा। यहां उपजिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद तिवारी व सीओ वीआर प्रेमी का घेराव कर अधिवत्ता राव वीरेंद्र सिंह को रिहा करने और तहसीलदार द्वारा दर्ज कराए गए फर्जी मुकदमें की मजिस्ट्रेटी जांच कराने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। करीब आधे घंटे तक दोनों अफसरों को अधिवक्ताआें को घेरे रखा। उनकी मांगाें को उच्चाधिकारियाें तक पहुंचाने का आश्वासन देकर अघिवक्ताआें को शांत कराया। जिस पर नारेबाजी करते हुए अधिवक्ता तहसील मुख्यालय को वापस लौट गए। अधिवक्ताओं ने ऐलान किया है कि शीघ्र ही अधिवक्ता को रिहा नहीं किया गया तो आंदोलन और जोरदार ढंग से किया जाएगा। इस मौके संयुक्त अधिवक्ता संघ के महामंत्री संतोष पांडेय, सतेश सिंह, मनोज सिंह, ज्ञान प्रकाश शुक्ल, राममोहन सिंह, देवी प्रसाद मिश्र, दिनेश मिश्रा, अजय शुक्ल, राधारमण शुक्ल, हरिशंकर, शैलेंद्र सिंह, टीपी यादव, लाल विनोद सिंह, शिवाकांत उपाध्याय, शेष तिवारी, शहजाद अंसारी, मिथलेश तिवारी, रामअभिलाख यादव, लाल राजेंद्र सिंह, प्रमोद तिवारी, कौशल शुक्ल, प्रदीप सिंह आदि मौजूद रहे।
न्याय की लड़ाई दबाने की साजिश है अधिवक्ताओं पर एफआईआर
अधिवक्ताओं पर कराई गई एफआईआर न्याय की लड़ाई दबाने की साजिश है। इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है। यह बातें अधिवक्ताओं ने तहसील में आयोजित आपात बैठक में कहीं। अधिवक्ताओं ने प्रस्ताव परित किया कि इसकी जांच न्यायिक अधिकारी या सीबीसीआईडी से कराई जाए। बैठक में सभी अधिवक्ताओं ने लालगंज के साथी अधिवक्ताओं की गिरफ्तारी पर आक्रोश जताया। इसके साथ ही न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। अधिवक्ताओं ने मांग करते हुए कहा कि दोषी कर्मचारी व अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो अधिवक्ता आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अधिवक्ताओं का कहना था कि लालगंज में अधिवक्ताओं को सुनियोजित तरीके से फंसाने की साजिश रची गई है। इतने बड़े पदाधिकारी व सीनियर अधिवक्ता किसी से मारपीट करने क्यों जाएगा। यही नहीं अधिवक्ताओं ने कहा कि पुलिस उन्हें दिन में कोतवाली ला सकती थी। रात में अधिवक्ताओं को उनके घर से उठाकर उन्हें अपराधी साबित किया जा रहा है। बैठक में दौरान सुनील त्रिपाठी, संजय पांडेय, रावेंद्र नाथ मिश्र, शैलेन्द्र तिवारी, रवि सिंह, प्यारे लाल, केके सिंह, दिनेश बहादुर सिंह, श्रीकांत पांडेय आदि मौजूद रहे।
क्रमिक विरोध के लिए संघर्ष समिति का गठन
संयुक्त अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राव वीरेंद्र सिंह के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई के विरोध में संघर्ष समिति और न्यायिक समिति का गठन किया है। तहसील परिसर में अधिवक्ताओं की हुई बैठक में संघ के अध्यक्ष राव वीरेंद्र सिंह के खिलाफ की गई पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की गई। अधिवक्ताओं ने कहा कि उपजिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी को दिए तीन सूत्रीय ज्ञापन में मांग की गई कि अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह द्वारा दी गई तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की जाय, पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्रों का निस्तारण किया जाय, एवं तहसीलदार द्वारा फर्जी आरोपी बनाए गए लोगों का नाम निकलवाया जाय। गठित की गई संघर्ष समिति में सतेश सिंह, संतोष पांडेय, अरुण मिश्र पिपरा, राधा रमण शुक्ल, के बी सिंह, ओंकार नाथ क्रांतिकारी, टी पी यादव, राम मोहन सिंह, राजेंद्र मिश्र, देवी प्रसाद मिश्र, ज्ञान प्रकाश शुक्ल, अनिल तिवारी महेश, राम लगन यादव, अजय कुमार शुक्ल, हरिशंकर द्विवेदी, शैलेंद्र सिंह बघेल, कमलेश तिवारी, धीरेंद्र मिश्र, पंजक गाना, शैलेंद्र मिश्र, दीपेंद्र तिवारी, अखिलेश द्विवेदी, शशिकांत मिश्र को शामिल किया गया है। इसी तरह न्यायिक समिति में देवी प्रसाद मिश्र आदि को शामिल किया गया है।