जिले में नकलविहीन परीक्षा कराने को लेकर की गई सारी कवायदों पर पानी फिर गया है। परीक्षा केंद्रों पर की गई किलेबंदी को नकलची और नकल माफिया चुनौती दे रहे हैं। परीक्षा केंद्रों पर इमला बोलकर नकल कराई जा रही है। सघन तलाशी के बाद भी नकल सामग्री लेकर परीक्षार्थी परीक्षा कक्ष तक पहुंच जा रहे हैं। इसकी गवाही कार्रवाई के आंकड़े भी दे रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार अब तक नकल के आरोप में 12 परीक्षार्थियों को रस्टीकेट किया जा चुका है। दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते चार ‘मुन्नाभाई’ भी पकड़े गए हैं। 7 केंद्रों को डिबार करने की संस्तुति की गई है। नकल पर लगाम लगाने को लेकर अफसर दौड़भाग कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी नकलची मान नहीं रहे हैं।
जिले में इस बार बोर्ड परीक्षा में नकल माफियाओं व नकलचियों पर लगाम कसने के लिए पुख्ता इंतजाम के दावे किए गए थे। पिछली बार 334 परीक्षा केंद्रों के सापेक्ष इस बार महज 218 परीक्षा केंद्र ही बनाए गए। ऐसा मानना था कि केंद्रों की संख्या कम होने पर बेहतर इंतजाम किए जा सकेंगे। इनमें से अतिसंवेदनशील व संवेदनशील 51 परीक्षा कें द्र निर्धारित किए गए। इसके अलावा 25 परीक्षा केद्रों पर अतिरिक्त नजर रखने की हिदायत दी गई। 9 सलच दल, 51 स्टेटिक मजिस्ट्रेट, 16 सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती गई। दो जोनल मजिस्ट्रेट भी लगाए गए।
इसके अलावा सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों के चलने व तलाशी के लिए अतिरिक्त सचल दल लगाए जाने का निर्देश दिया गया। विभाग का मानना था कि इस बार नकल माफिया का मंसूबा नहीं पूरा होने पाएगा, लेकिन सारी कवायद धरी की धरी रह गई। नकलविहीन परीक्षा के सारे तामझाम को धता बताकर परीक्षा केंद्रों पर इमला बोलकर नकल कराई जा रही है। अफसर इस पर अंकुश लगाने को लेकर भागदौड़ कर रहे हैं। यही कारण है कि महज हप्तेभर की परीक्षा में 7 केंद्रों को डिबार करने की संस्तुति की गई, जबकि 6 कक्ष निरीक्षकों को कार्यमुक्त किया गया है। दो केंद्र व्यवस्थापकों को हटाया जा चुका है। इसके अलावा तीन छात्र ऐसे पकड़े गए जो दूसरी बार परीक्षा दे रहे थे। मजे की बात यह है कि इसके बाद भी विभागीय अफसर जिले में नकलविहीन परीक्षा होने का ढिंढोरा पीट रहे हैं।