सुप्रीमकोर्ट की रोक बावजूद शहर से लेकर गांव तक गली-गली तेजाब की बिक्री हो रही है। परचून की दुकानों पर 40 से 80 रुपये में तेजाब की शीशियां बेची जा रही हैं। इस पर रोक लगाना तो दूर प्रशासन ने कभी जांच करने की भी जरूरत नहीं समझी। ये तेजाब आम दुकानों पर कहां से आ रहा है, कौन इसकी सप्लाई कर रहा है, इसे भी जानने की कभी जरूरत नहीं समझी गई। मुनाफा कमाने के लिए दुकानदार भी तेजाब खरीदने वालों के बारे में जानकारी जुटाना मुनासिब नहीं समझते। प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है कि जब तब युवतियों पर तेजाब से हमले की घटनाएं हो जाती हैं।
युवतियों व छात्राओं पर तेजाब फेंकने की घटनाओं को संजीदगी से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को तेजाब बेचने व खरीदने वालों के लिए नियम कानून बनाने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराते हुए शासन व प्रशासन ने जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। शहर में दो दुकानदारों ने तेजाब बेचने का लाइसेंस ले रखा है। उनके पास से बैट्री, सोने के जेवरात साफ करने वाला और शौचालय की सफाई करने में प्रयोग होने वाला तेजाब मिलता है। इन्हीं दुकानों से शहर व ग्रामीण अंचलों में परचून, बेट्री व आभूषण के दुकानदार तेजाब खरीदकर ले जाते हैं। खास बात यह है कि सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल वाले एसिड के प्रयोग से शरीर का मांस ही नहीं बल्कि हड्डी तक गल जाती है। इसका प्रयोग जेवरात को साफ करने में प्रयोग होता है। 1250 ग्रेच्युटी वाले एसिड को बैट्री के उपयोग में लाया जाता है। इसके अलावा शौचालयों की सफाई के लिए 800 से लेकर 1000 ग्रेच्युटी वाले को तनु सल्फ्यूरिक एसिड कहा जाता है। जिससे लोगों का मांस जल जाता है।
इसके एवज में थोक दुकानदार मोटी कमाई भी करते हैं। तेजाब की शीशी चाहे वह शौचालय की सफाई के लिए खरीदी जाए या फिर दूसरे कार्य के लिए उपयोग में लाने के लिए। बिना खरीदार का ब्यौरा लिए नहीं देना चाहिए। सरकार के इस आदेश को दरकिनार कर दुकानदार मनमानी कर रहे हैं। इसकी जांच का जिम्मा अधिकारियों के अलावा पुलिस पर होता है, लेकिन पुलिस को इस काम के लिए फुर्सत ही नहीं है।