प्रतापगढ़। आईएएस की पत्नी पति के साथ मध्यप्रदेश में रहतीं हैं। उसके बगैर दस्तखत के ही प्रत्येक माह वेतन खाते में पहुंच रहा है। शिक्षक नेताओं के इस खेल का खुलासा ढाई साल बाद हुआ है। तैनाती वाले स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर में भी शिक्षिका का नाम नहीं है। फिर भी बीआरसी से वेतन बिल पास कर टोकन मनी की कमाई हो रही है।
जिले के गौरा विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय डिघवट में अंकिता पांडेय सहायक अध्यापिका के रूप में तैनात हैं। मगर इनका नाम स्कूल की उपस्थिति रजिस्टर में नहीं है। प्रत्येक माह उनके खाते में वेतन का भुगतान किया जा रहा है। यह शिकायत मिलने पर सीडीओ ने गौरा बीडीओ से जांच कराने को कहा। 25 सितंबर को एडीओ (आईएसबी) स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे तो स्कूल में प्रभारी हेडमास्टर बृजेश कुमार और सहायक अध्यापक विनोद कुमार मौजूद मिले। उपस्थिति रजिस्टर में अंकिता पांडेय का नाम नहीं था। स्कूल में मौजूद अध्यापकों ने बताया कि करीब ढाई साल पहले अंकिता पांडेय स्कूल में कार्यभार ग्रहण करने आई थीं। उसके बाद स्कूल नहीं आईं। दरअसल में शिक्षक नेताओं के इस खेल का खुलासा न हो, इसके लिए दो-दो उपस्थिति रजिस्टर बना रखा है।
पहला स्कूल में रहता है, तो दूसरा शिक्षक नेताओं के कब्जे में होता है। वेतन भुगतान के लिए स्कूलों से आने वाले प्रपत्र 9 में बीआरसी में बैठे शिक्षक नेता नाम शामिल कर देते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो शिक्षक नेता शिक्षिका को फर्जी वेतन दिलाने के एवज में 15,000 हजार रुपये प्रति माह टोकनमनी के रूप में लेते हैं। सीडीओ राजकमल यादव ने बताया कि बीडीओ की रिपोर्ट आ गई है। बीएसए को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है। बीएसए अशोक कुमार सिंह ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।