क्षेत्र में धधक रही 32 यूनिट कोयले की भट्ठियों को वन विभाग ने प्रशासन की मदद से नष्ट करा दी। पूरे दिन चली कार्रवाई में एक दर्जन से भी ज्यादा गांव इसके दायरे में आए। अचानक लावलश्कर के साथ गांव में पहुंचने के कारण हड़कंप की स्थिति रही। बुधवार की सुबह डीएफओ वाईपी शुक्ला कुंडा वन कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने एसडीएम, सीओ व कोतवाल के साथ रणनीति बनाई। इसके बाद पुलिस की भारी फोर्स और फायर ब्रिगेड के साथ वह मौली गांव पहुंचे। फायर ब्रिगेड के माध्यम से भट्ठियों को बुझाने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता न मिलने पर उसे लाठी डंडों के माध्यम से गिरा दिया गया। एकाएक शुरू हुई इस कार्रवाई से गांव में हड़कंप मच गया।
आग न लगे इसके लिए फायर ब्रिगेड से लगातार पानी की धार छोड़ी जाती रही। वन विभाग के गार्ड, वन दरोगाओं के साथ ही पुलिस के सिपाही भी इसे तोड़ने में जुट गए। थोड़ी ही देर में कई भट्ठियां ढहा दी गईं। इसके बाद बेतीं, शेखपुर, बरई, आलापुर, फरेंदूपुर, हीरागंज, बिहार, कालाकांकर, परियावंा, संग्रामगढ़, बाबागंज सहित कई जगहों पर अभियान चलाकर भट्ठियां तोड़ी गईं। मौके पर कुछ लोगों ने इसका विरोध करने का प्रयास किया लेकिन भारी फोर्स देखकर उनकी हिम्मत जवाब दे गई। यह कार्रवाई शाम तक चलती रही। जो लोग भट्ठियों का संचालन करते थे वे उसे छोड़कर भाग निकले। अभियान में एसडीएम प्रदीप कुमार, सीओ कवींद्रनाथ मिश्रा, कोतवाल आरके सिंह चंदेल, वन विभाग के रेंजर शिव शंकर सिंह सहित वन विभाग के कर्मचारी व भारी पुलिस फोर्स मौजूद रही।
एकाएक शुरू हुई इस कार्रवाई से किसी को कुछ करने का मौका नहीं मिला। बाद के कुछ गांवों के लोगोें ने हिम्मत दिखाकर हाईकोर्ट का कोई कागज दिखाने का प्रयास किया। उनके आदेश के क्रम में डीएफओ ने उन्हें नया आदेश दिखाते हुए इसे तोड़ने का क्रम जारी रखने की बात कही। किसी ने यदि ज्यादा बोलने का प्रयास किया तो उसे पुलिस ने गाड़ी में बैठा लिया। वाईपी शुक्ला, डीएफओ प्रतापगढ़ ने बताया कि कार्रवाई चल रही है, 32 यूनिट भट्ठियां तोड़ी जा चुकी हैं। संचालकों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दे दी गई है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।