फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साइलेंट नकल के साथ बाहर लिखी जा रहीं कापियां

विज्ञापन
विज्ञापन
साइलेंट नकल के साथ बाहर लिखी जा रहीं कापियां
विज्ञापन

नकल माफियाओं ने तोड़ा अफसरों का चक्रव्यूह
कुंडा और लालगंज संकलन केंद्रों पर हो रहा खेल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में साइलेंट नकल के साथ ही बाहर कापियां लिखी जा रहीं हैं। अफसरों ने नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए भले ही वाइस रिकार्डर और सीसीटीवी कैमरे को हथियार बनाया, मगर नकल माफियाओं ने उनके चक्रव्यूह को तोड़ने मे सफल दिख रहे हैं। सांगीपुर बाजार में जिस प्रकार बोर्ड की कापियां लिखी जा रही हैं, उससे यह साफ है लालगंज और कुंडा संकलन केंद्रों पर व्यापक स्तर पर खेल हो रहा है।
नकलची जिले के रुप में अपनी पहचान बना चुके बेल्हा में इस वर्ष की परीक्षा में साइलेंट नकल हो रही है। परीक्षा केंद्रों के अंदर और बाहर सन्नाटा पसरा रहता है। मगर परीक्षा खत्म होते ही बाहर से लिखी हुई कापियां जमा कराई जा रही है। नकल माफियाओं के इस खेल में कर्मचारी से लेकर अफसर तक शामिल है। जिले के सांगीपुर विकास खंड में सोमवार को शाम पुलिस ने जो कापियां और पेपर बरामद किए हैं, उसकी परीक्षा पहले हो चुकी थी। इससे साफ है कि नकल माफिया सिर्फ परीक्षा केंद्रों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका जाल संकलन केंद्रों तक फैला हुआ है। दरअसल में तहसीलों में स्थित संकलन केंद्रों पर कापियां जमा करने में काफी मनमानी हो रही है। विभाग के परीक्षा के बाद दो घंटे में कापियां जमा करने को कहा गया है, मगर आलम यह है कि पांच-पांच घंटे बाद कापियां जमा की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि नकल माफियाओं के खेल में संकलन केंद्र की भूमिका संदिग्ध है।
विज्ञापन

इनसेट--------
अब खुला टापर बनने का राज
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में लालगंज और कुंडा इलाके के अधिकांश बच्चे अभी तक टापर बनते रहे हैं। सांगीपुर पुलिस ने घर में कापियां लिखे जाने का खुलासा करके यह साफ कर दिया है कि नकल माफियाओं ने अपने कालेजों का नाम चमकाने के लिए कापी लिखने के खेल पहले से कर रहे हैं। फिलहाल इतना सब होने के बाद भी अफसर नकल माफियाओं पर शिकंजा कसने में फेल रहे हैं।
इनसेट---------
परीक्षा खत्म होने के बाद आती हैं कापियां
जिले के सदर, पट्टी, रानीगंज, लालगंज और कुंडा तहसीलों में संकलन केंद्र बनाए गए हैं। तहसीलों पर जमा होने वाली उत्तर पुस्तिकाएं पूरी परीक्षा खत्म होने के बाद मुख्यालय पर आती है। इससे नकल माफियाओं के पास कापी बदलवाने का भरपूर समय होता है। इसी का लाभ उठाकर नकल माफिया कापी बदलवाने का खेल कर रहे हैं।
24 घंटे बाद भी कालेज का नाम नहीं खोज पाया विभाग
जिले के आवंटन में शामिल हैं कापियां त संकलन केंद्र के सीसीटीवी कैमरे पर टिकी अफसरों की नजर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। सांगीपुर पुलिस ने इंटरमीडिएट की जो कोडेड कापियां बरामद की है, वह किस कालेज के लिए आवंटित हुई हैं, उसकी तहकीकात 24 घंटे के बाद भी विभाग नहीं कर पाया है। हालांकि जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि यूपी बोर्ड ने इन कापियों को प्रतापगढ़ के लिए आवंटित किया गया है। फिलहाल कापियों के बदलने के खेल का खुलासा करने के लिए अब संकलन केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज पर अफसरों की नजरें टिकी हुई हैं।
जिले के सांगीपुर पुलिस ने थाने के समीप राजेंद्र गुप्ता के घर में सोमवार की शाम यूपी बोर्ड की कापियां लिखे जाने का खुलासा किया है। इन कापियों पर जो कोड अंकित है, वह तो जिले के लिए आंवटित है, मगर विभाग 24 घंटे की जांच के बाद भी यह खुलासा नहीं कर पाया कि यह कोडेड कापियां किस कालेज के लिए आवंटित की गई हैं। सोमवार को विभागीय अधिकारी कोडेड कापियों में जांच में लगा रहा, मगर सफलता नहीं मिली। विभागीय जानकारों की माने तो परीक्षा खत्म होने वाले विषयों की कापियां लिखाने का एक ही औचित्य समझ में आता है कि नकल माफिया संकलन केंद्रों से इन कापियों को बदलने का खेल कर रहे हैं। तहसीलों में स्थित संकलन केंद्रों पर फौरी तौर पर कापियों का बंडल जमा कर दिया जाता है, बाद में कापियां लिखवाकर संकलन केंद्रों पर रखे बंडल में कापियां डालकर नए सिरे से सील कर दी जाती हैं। फिलहाल जब तक यह साफ नहीं होता है कि कापियां किस कालेज के लिए आवंटित हैं, तब तक कुछ कहना मुश्किल है।
विज्ञापन

वर्जन------
सांगीपुर पुलिस जो कोडेड कापियां बरामद की हैं, वह जिले के लिए ही आवंटित की गई थी। परीक्षा कराने के लिए लगभग तीन लाख कापियां आई हैं, जिसमें लगभग काफी कापियां अभी कार्यालय में है। कोडेड कापियों का मिलान किया जा रहा है, कि गडबड़ी ऑफिस से हुई, या किसी कालेज से कापियां निकली है।
एसपी यादव, डीआईओएस
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें