प्रतापगढ़। तीन साल पहले एसटीएफ और नगर कोतवाली पुलिस ने झारखंड से आ रहे ट्रक से तीन क्विंटल गांजा बरामद किया था। यह गांजा कोतवाली से गायब हो गया था। इस मामले में न्यायालय के शिकंजा कसने पर कोतवाली में पूर्व इंस्पेक्टर और मुंशी के खिलाफ अमानत के खयानत का मुकदमा दर्ज कराया गया था। कोतवाली परिसर से गायब 13 पैकेट का बंडल नाटकीय तरीके से बरामद भी हो गया है। परिसर में स्थित एक कमरे में बिखरा व सड़ा हुआ गांजा मिलने की चर्चा है।
कंधई थाना क्षेत्र के रखहा बाजार निवासी शंकरलाल के पास झारखंड से एक ट्रक में तीन क्विंटल गांजा लादकर लाया जा रहा था। जिसे 16 दिसंबर 2015 को एसटीएफ और तत्कालीन नगर कोतवाल हरपाल सिंह ने गांजा पकड़ा था। कोतवाली परिसर से गांजा समेत बंडल गायब हो गया था। इस मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद कोतवाली के मुख्य आरक्षी मिर्जा मसर्रत अली की तहरीर पर कोतवाली में पूर्व कोतवाल हरपाल सिंह और मुंशी मनफूल के खिलाफ अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
मामले की विवेचना के दौरान पूर्व कोतवाल बयान दर्ज कराने भी कोतवाली पहुंचे। अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखते हुए अभिलेख भी दिखाए। पुलिस सूत्रों की मानें तो रविवार की देर शाम कोतवाली परिसर में ही नाटकीय तरीके से गांजा के 13 सीलबंद बंडल जीर्ण-शीर्ण हालत में बरामद हो गए। कमरे में ही गांजा भी बिखरा पड़ा मिला। गांजा गायब होने के मामले में कोतवाली में तैनात रहे एक चालक की भी भूमिका संदेह के घेरे में है। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी पूर्णेंदु सिंह ने बताया कि उन्हें गांजा बरामद होने की जानकारी नहीं है। इतना जरूर है कि पूर्व में मुंशी ने गांजा समेत ट्रक को मुख्य आरक्षीत्र् को हस्तांरित किया है। जांच में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।