प्रतापगढ़। जिला अस्पताल के एक लिपिक ने बुधवार को सीएमएस को उनके चैंबर में घुसकर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। मारपीट करने के बाद वह फरार हो गया। सीएमएस ने इसकी शिकायत डीएम से की। सूचना मिलने पर कोतवाल हमराहियों के साथ अस्पताल पहुंचे। सीएमएस ने आरोपी के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डा. प्रेममोहन गुप्ता और लिपिक सत्यप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ तन्नू के बीच सप्ताह भर से तनातनी चल रही थी। सीएमएस की मानी जाए तो लिपिक रोगी कल्याण समिति की फाइलें लेकर गायब हो गया है। उसे डीएम के पास जमा करना है। कई बार उससे फाइल की मांग की गई, लेकिन वह नहीं दे रहा था। मंगलवार को फाइल की मांग की गई तो वह दोपहर बाद घर चला गया। बुधवार को सत्यप्रकाश के पास कई बार फोन किया गया, मगर वह फोन नहीं रिसीव कर रहा था। इस पर सीएमएस ने उसे बुलाने के लिए जिला अस्पताल चौकी में तैनात सिपाही अनिल कुमार के साथ शव वाहन के चालक पवन कुमार को सुबह उसके घर भेज दिया। लिपिक ने सिपाही को लौटा दिया और थोड़ी देर बाद अस्पताल आने की बात कही। इस पर सिपाही व पवन लौट आए। प्रभारी सीएमएस प्रेममोहन गुप्ता की मानी ताए तो सत्यप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ तन्नूू शराब के नशे में धुत होकर अस्पताल पहुंचा। उनसे कहासुनी करने लगा। बात बढ़ी तो चैंबर में ही उनकी पिटाई शुरू कर दी। शोर पर अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी पहुंचे तो मौका पाकर लिपिक फरार हो गया। सीएमएस ने बताया कि वह अपराधी है।
पान विक्रेता को गोली मारकर घायल कर चुका है। कुछ माह पहले ही जेल से छूटकर आया और अस्पताल में ज्वाइन किया। उधर , सत्यप्रकाश उर्फ तन्नू ने आरोप लगाया कि सप्ताह भर से उसे सीएमएस परेशान कर रहे हैं। हर बात पर अपशब्द कहते हैं। वह फाइल देने के लिए उनके चैंबर में गया था। कहासुनी जरूर हुई है, मगर मारपीट की बात गलत है। नगर कोतवाल ने बताया कि सीएमएस ने मारपीट की तहरीर दी है। मामले की जांच की जा रही है। मेरा सिपाही सत्यप्रकाश के घर नहीं गया था। मामले की जांच के बाद अगर वह दोषी है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। जिला अस्पताल में तैनात एनआरएम पटल पर बैठने वाले लिपिक सचिन से सप्ताह भर पहले सीएमएस का कहासुनी हो गई थी। सीएमएस ने सचिन को भी अपशब्द कह दिया था। उस दौरान भी मारपीट का नौबत आ गई थी। मगर सचिन विवाद से बचने के चक्कर में अस्पताल से कुछ देर के लिये हट गया। अंत में सीएमएस ने सचिन को सीएमओ आफिस में अटैच कर दिया। इससे अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों में नाराजगी थी।