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सोशल साइट्स से दरक रहा दांपत्य जीवन

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प्रतापगढ़। व्हाट्सएप और फेसबुक पर चैटिंग के नशे ने कई दंपतियों के वैवाहिक जीवन में दरार डाल दी है। एक-दूसरे को समय देने के बजाए चैटिंग में लगातार व्यस्त रहने के कारण दांपत्य जीवन बिखर रहा है। पति-पत्नी के संबंधोें में दरार आ रही है। हर माह परिवार परामर्श केंद्र और महिला कल्याण केंद्र में पांच से सात ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। कहीं महिला को पति के दूसरी महिलाओं से बात करने से दिक्कत पैदा हो रही है तो कहीं पति को पत्नी के देर तक फेसबुक पर समय देना पसंद नहीं आ रहा है। पति-पत्नी के बीच इस मामले को लेकर तनातनी इस कदर बढ़ रही है कि सात जन्मोें का बंधन तोड़ने पर आमादा हैं। छोटे और मध्यम वर्गीय परिवार ही नहीं बड़े घरानों के विवाद भी थाने और कोर्ट कचहरी तक पहुंच रहे हैं। शक की बुनियाद में कई परिवार बिखरने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
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उड़ीसा की रहने वाली कुड़ी महाराणा से सुलतानपुर के योगेश ने रेलवे में नौकरी के दौरान विवाह कर लिया। बाद में शिक्षक की नौकरी मिलने पर सुलतानपुर आ गया। मिडिल स्कूल में नौकरी करने के दौरान वह कुड़ी महाराणा को लेकर चिलबिला में किराए के मकान में रहने लगा। कुड़ी की मानें तो स्कूल मेें पढ़ाने के दौरान योगेश एक शिक्षिका से दिल लगा बैठा। अक्सर मोबाइल से दोनों बातचीत करते रहते। फेसबुक और व्हाट्सएप पर व्यस्त रहने के कारण कुड़ी को शंका होने लगा। एक दिन मोबाइल हाथ में आया तो उसने पति की करतूत देख ली। जिसके बाद दोनों के बीच विवाद होने लगा। मामला थाने तक पहुंचा। परिवार परामर्श केंद्र से भी कोई मदद नहीं मिली। बाद में योगेश के खिलाफ कुड़ी ने मुकदमा दर्ज कराया। दोनों आज अलग-अलग जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

रानीगंज के रहने वाले सोहराब (काल्पनिक नाम) का विवाह नगर कोतवाली के करनपुर की रहने वाली सना (बदला नाम) के साथ तीन वर्ष पहले हुआ था। शादी के बाद सना मोबाइल पर लगातार व्यस्त रहती थी। पति के काम पर जाते ही वह चैटिंग में व्यस्त हो जाती। इस मामले को लेकर दोनों के बीच कई बार विवाद हो गया। मोबाइल पर अक्सर व्यस्त रहने के मामले में दोनों परिवार के लोगों के बीच पंचायत भी हुई, लेकिन मामला सुलझने के बजाय उलझता गया। अब सना के परिवार के लोगों ने परिवार कल्याण परामर्श केंद्र मेें प्रार्थना पत्र दिया है। कई बार दोनों का आमना सामना हुआ, लेकिन बात नहीं बनी। अब दोनों के रिश्ते टूटने की कगार पर पहुंच गए हैं।
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समाजशास्त्री डा. पीयूषकांत शर्मा का कहना है कि सामाजिक संबंध कमजोर हो रहे हैं। लोग सोशल मीडिया में ही व्यस्त रहते हैं। फेसबुक के अंजान दोस्तों को ही अपना समझने लगते हैं। लेकिन ये एक धोखा है। लोगों को इससे दूर रहने की जरूरत है। सोशल साइट्स का नई पीढ़ी गलत इस्तेमाल कर रही है। इसका इस्तेमाल तय समय और सही चीजों के लिए होना चाहिए। युवा पीढ़ी इंटरनेट का सदुपयोग करने के बजाय उसमें उलझ गई है। इसका विपरीत असर वैवाहिक जीवन पर पड़ रहा है।वहीं प्रभारी महिला परामर्श केंद्र पूनम सिंह का कहना है कि हर माह पांच से सात मामले ऐसे आ रहे हैं, जिसमे पति-पत्नी के बीच विवाद की वजह फोन पर अधिक बात करना और फेसबुक, व्हाट्सएप पर अधिक समय देना है। तमाम प्रयास के बाद भी लोगों के मन से शक दूर नही होता। कार्यशैली में बदलाव आ गया है। ऐसे मेें दोनों परिवार के मुखिया की भूमिका अहम होती है।
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