जनपद की पुलिस बदमाशों के आगे पसीना छोड़ रही है। तभी तो सरकारी खजाना लगाता लुटता जा रहा है और पुलिस अफसर चैन की बंशी बजा रहे हैं। केवल मौके का निरीक्षण व वाहनों की चेकिंग कराकर बदमाशों की धरपकड़ का राग अलापना ही पुलिस अफसरों के बूते की बात रह गई है। जिले की पुलिस बदमाशों के आगे पूरी तरह से घुटना टेकती नजर आ रही है। सरकारी खजाना लुटने के बाद भले ही कुछ दिनों तक पुलिस लोगों की निगाह में हाथ पैर मार लेती हो। लेकिन बाद में पुलिस केवल औपचारिकता ही निभाती है। एक वर्ष पूर्व रोडवेज परिसर से बदमाशों ने कैशियर की गोली मारकर हत्या करने के बाद दस लाख रुपये लूट लिए थे।
क्राइम ब्रांच ने बदमाशों को पकड़ने का दावा किया लेकिन उसका दावा किसी के गले नहीं उतरा। 31 मार्च को बदमाशों ने नगर कोतवाली के महुली स्थित एआरटीओ कार्यालय में घुसकर कर्मचारी रज्जन प्रसाद को गोली मारने के बाद 22 लाख रुपये लूटकर भाग निकले। इन घटनाओं के बाद भी पुलिस अफसर लापरवाही बरतने वाले मातहतों पर कार्रवाई के बजाय उनकी पीठ ही थपथपाते रहे। जिसका नतीजा यह रहा कि बदमाश संग्रामगढ़ थाने के करीब ही दुस्साहस का परिचय देते हुए 11 लाख रुपये लूटकर फरार हो गए। कुछ दिनों तक अफसर थानेदार व सीओ से पूछताछ करते रहेंगे। कुछ संदिग्ध लोगों की धरपकड़ भी की जाएगी। बाद में लेनदेन कर उन लोगों को छोड़ भी दिया जाएगा। इसके बाद सरकारी खजाना लूटने की घटना ठंडे बस्ते में चली जाएगी।