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दर्शन करने आए चचेरे भाई डूबे, एक की मौत

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बाबा घुइसरनाथ धाम सई नदी में नहाते समय डूबने से मृत श्रद्धालु के बिलखते परिजन। - फोटो : PRATAPGARH
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घुइसरनाथधाम में दर्शन करने आए अमेठी जिले के चचेरे भाई नहाते समय सई नदी में डूब गए। सूचना पर पहुंचे गोताखोरों ने उन्हें किसी तरह पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक एक की मौत हो चुकी थी। दूसरे की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया है। घटना से परिजनों में कोहराम मच गया।
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अमेठी जिले के कोरारी नुनावा निवासी कृष्णा सोनी (17) पुत्र रामप्रसाद इंटर का छात्र था। सोमवार को वह अपने चचेरे भाई हिमांशु सोनी (19) पुत्र गया प्रसाद व दादा बजरंग सोनी के साथ सांगीपुर थाना क्षेत्र स्थित घुइसरनाथधाम में दर्शन-पूजन के लिए आया था। हिमांशु बीए का छात्र है। धाम पहुंचने के बाद दोनों दादा को एक दुकान पर बैठाकर सई नदी में नहाने चले गए। नहाते समय अचानक कृष्णा गहरे पानी में डूबने लगा। यह देख हिमांशु बचाने के लिए उसकी तरफ बढ़ा तो वह भी डूबने लगा। देखते ही देखते दोनों गहरे पानी में समा गए।
यह देख लोगों ने शोर मचाया तो घाट पर मौजूद गोताखोर बचाने के लिए कूद पड़े। गोताखोरों ने हिमांशु को बेहोशी की हालत में बाहर निकाल लिया, लेकिन कृष्णा का कुछ पता नहीं चला। करीब आधे घंटे तलाश के बाद गोताखोर उसे निकालने में कामयाब हो सके। आननफानन में पुलिस दोनों भाइयों को एंबुलेंस से सांगीपुर सीएचसी ले गई। यहां चिकित्सकों ने कृष्णा को मृत घोषित कर दिया।
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जबकि हिमांशु को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना की जानकारी पर परिजन भागकर सांगीपुर अस्पताल पहुंचे और शव से लिपट कर बिलखने लगे। किसी तरह पुलिस ने परिजनों को समझाबुझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों के मुताबिक हिमांशु की हालत भी गंभीर बनी है।
पखवारे भर पहले हुई छात्र की मौत से नहीं लिया सबक
घुइसरनाथधाम। स्थानीय धाम में सावन के आखिरी सोमवार को दर्शन करने आए कृष्णा सोनी की मौत के लिए सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन जिम्मेदार है। सई नदी में जहां कृष्णा की डूबने से मौत हुई, उसी घाट पर बीते 27 जुलाई को लालगंज के सितांशु की नदी में समा जाने से मौत हो गई। तब सई घाट की बैरिकेडिंग के लिए सिर्फ एक रस्सी बांधी गई थी। सितांशु की मौत के बाद भी पुलिस-प्रशासन ने सबक नहीं लिया। बैरिकेडिंग के नाम पर रस्सी की जगह औपचारिकता में एक बांस बांध दिया गया।
जिसके नीचे से नदी में नहाने जाने वाला कोई भी श्रद्धालु आसानी से गहरे पानी में समा सकता था। इसके साथ ही एक्सपर्ट गोताखारों की जगह पुलिस ने आसपास के गोताखोरों को बैठाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। घाट की सुरक्षा दरोगा व सिपाहियों के बदले होमगार्ड के हवाले कर दी गई। इसका खामियाजा सावन माह के दौरान बाबा धाम में दूसरे श्रद्धालु की मौत से चुकाना पड़ा।
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