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चार सीएचसी का नहीं शुरू हो सका निर्माण

Fri, 26 Dec 2014 10:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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वर्ष 2014 को बीतने में चंद दिन ही शेष हैं मगर सरकार से मंजूरी के बाद भी चार सामुदायिक केन्द्रों का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका जबकि कई माह पूर्व सरकार ने निर्माण के लिए चार करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिए थे। सीएमओ कार्यालय का भी काम अधूरा ही रह गया। जिला महिला अस्पताल में 100 बेड के  मेटरनिटी वार्ड के निर्माण की शुरुआत नहीं हो सकी।
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चिकित्सा के क्षेत्र में बेदम इस जिले के तमाम क्षेत्रों में सीएचसी यानी सामुदायिक केन्द्रों की जरूरत है। जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के प्रयास से रानीगंज कैथौला, छितपालगढ़, डेरवा व हथिगवां में सीएचसी निर्माण की शासन से मंजूरी मिली। अस्पताल निर्माण के प्रस्ताव को हरी झंडी मिली तो सरकार से धन की मांग की गई। शासन से स्वास्थ्य विभाग को प्रति अस्पताल के लिए एक-एक कुल चार करोड़ रुपए का बजट मिला। पैसा विभाग के खाते में आने के बाद उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को काम कराने की जिम्मेदारी दी गई। यह साल बीतने वाला है मगर उन अस्पतालों का निर्माण तो दूर आज तक नींव तक नहीं खुद सकी। जिला महिला अस्पताल में कम बेड होने से प्रसूताओं के दिक्कत को देखते हुए सरकार ने 100 बेड का मेटरनिटी विंग बनाने की मंजूरी दी। अधिकारियों से जमीन का प्रस्ताव मांगा गया था। पर्याप्त जमीन न मिल पाने के कारण यह निर्माण भी आज तक शुरू नहीं हो सका। इस वर्ष गौर करने वाली बात यह भी रही कि सीएमओ कार्यालय का भवन भी पूरी तरह कम्प्लीट नहीं हुआ। ऐसे में सीएमओ कार्यालय के कर्मचारियों को आज भी जिला अस्पताल के भवन में बैठना पड़ रहा है।

बालिका शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े इस जिले में विद्यालयों के निर्माण की स्थिति भी इस वर्ष खराब ही रही। सरकार ने जनपद में 15 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के निर्माण की मंजूरी दी थी। इनमें से 11 का निर्माण पूरा जरूर हुआ मगर उसे आज तक कार्यदायी संस्थाओं ने विभागीय अफसरों को नहीं सौंपा। शेष चार स्कूलों का निर्माण इस वर्ष भी पूरा नहीं हो सका। इसकी वजह कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही व अफसरों की अनदेखी बताई जा रही है।
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वर्ष 2014 बीतने वाला है मगर प्रतापगढ़-इलाहाबाद मार्ग पर गजेहड़ा जंगल के पास बकुलाही नदी का टूटा पुल  नहीं बन सका। जबकि इसके निर्माण की प्रक्रिया करीब डेढ़ साल से चल रही है। प्रतिदिन हजारों लोगों को पुल के पास बने बाईपास से होकर इलाहाबाद का सफर तय करना पड़ रहा है। बन रहे पुल के नक्शे में कुछ माह पूर्व कोई दिक्कत आई थी। नक्शे में सुधार के बाद भी काम में गति नहीं आ रही।
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