आधा शिक्षा सत्र बीतने के बाद परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पुस्तकें मिली हैं। समय से किताबें न मिलने से इस बार बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। अब किताबें बच्चों को भले हीं मिल गई है, मगर कोर्स पूरा कराना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
जिले के 2032 प्राइमरी, 722 मिडिल और 160 सहायता प्राप्त स्कूलों में 2,83,475 बच्चे पढ़ाई करते हैं। अप्रैल माह से नए शिक्षासत्र की शुरुआत हुई, मगर बेसिक शिक्षा विभाग से पुस्तकें बच्चों को नहीं मिलीं। वे बगैर पुस्तकों के ही पढ़ाई करते रहे।
जुलाई माह में पुस्तकों की खेप आई, लेकिन वह पर्याप्त नहीं थी। कहीं मिली तो कहीं बच्चें पुस्तकों का इंतजार करते रहे। धीरे-धीरे शिक्षा सत्र के छह माह बीत गए। यानी आधा शिक्षासत्र बगैर पुस्तकों के ही निकल गया।
आधा शिक्षासत्र बीतने के बाद अब विद्यालयों में पुस्तकें मुहैया हो पाई हैं। अब समय से कोर्स पूरा करना चुनौती होगा। बीएसए भूपेंद्र सिंह ने बताया कि नई किताबें नहीं आई थीं। पुरानी किताबों से पठन-पाठन कराया जा रहा था। शैक्षिक सत्र के हिसाब से बच्चों का कोर्स पूरा हो चुका है। पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं आएगी।