लोकसभा चुनाव से पहले जिन गांवों में भाजपा प्रत्याशी भोला सिंह का विरोध किया गया था, उन गांवों में भी भाजपा को जमकर वोट मिले। लोगों ने विकास नहीं कराने का आरोप लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन किया था। दीवारों पर पोस्टर भी चस्पा किए थे। जबकि, कुछ गांवों के लोगों ने विकास नहीं तो वोट नहीं का नारा देते हुए मतदान का बहिष्कार किया था। इन गांवों में जितने वोट पड़े, उसमें भाजपा प्रत्याशी सबसे आगे रहे।
भाजपा ने दो बार से सांसद विनोद सोनकर पर तीसरी बार भरोसा जताते हुए उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने चुनाव प्रचार शुरू किया तो कई गांवों में लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। लोगों ने आरोप लगाए कि सांसद रहते हुए उनके गांव में कोई विकास कार्य नहीं कराया। धीर-धीरे यह विरोध और बढ़ता चला गई।
सिराथू विधानसभा के हिसामपुर माढ़ौ में रेलवे अंडरपास के जलभराव से आवागमन की समस्या को लेकर लोगों ने नाराजगी जाहिर की थी। वहीं सदर विधानसभा के धरमपुर गांव में सड़क की बदहाली को लेकर नाराजगी रही। जबकि नगर पालिका परिषद भरवारी के बैरिहा मोहल्ले के नागरिकों ने जनसमस्याओं को लेकर विरोध-प्रदर्शन करते हुए चुनाव से पहले वीडियो भी वायरल किए। मतदान के दिन तीनों जगह लोगों ने मतदान का बहिष्कार कर दिया था। नारे लगाए थे कि विकास नहीं तो वोट नहीं।
इसके पोस्टर भी चस्पा कर दिए गए थे। बाद में पुलिस एवं प्रशासन के अफसरों ने मौके पर पहुंच ग्रामीणों को आश्वासन देकर मतदान प्रारंभ कराया। चार जून को आए नतीजों में तीनों स्थानों पर भाजपा का प्रदर्शन अव्वल रहा। हिसामपुर माढ़ो की बात करें तो यहां के बूथ संख्या 315 पर कुल 535 मत पड़े थे। इनमें से भाजपा को 328, सपा को 173 व बसपा को मात्र 43 वोट मिले। वहीं, धरमपुर के आठ बूथों पर भाजपा को 2030, सपा को 1651 और बसपा को सिर्फ 306 वोट मिले। इसी तरह बैरिहा मोहल्ले के बूथ संख्या सात में भाजपा को 204 व सपा को 34 वोट मिले। यहां से बसपा को एक भी वोट नहीं मिला।