बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना को लेकर जिले के अफसर कितने फिक्रमंद हैं, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इसके प्रचार-प्रसार के लिए पांच साल पहले मिली बीस लाख रुपये की धनराशि जस की तस पड़ी है। पांच साल में अफसर एक रुपये नहीं खर्च कर सके। मतलब प्रचार-प्रसार भी नहीं हुआ।
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देनेे के शासन ने पांच साल पहले बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना प्रारंभ की थी। इस योजना का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या रोकने और बेटियों को पढ़ाई के लिए अभिभावकों को जागरूक करने के लिए शहर से गांव तक व्यापक प्रचार-प्रसार करना था।
इस योजना में उत्कृष्ट कार्य करने वाली बेटियों को पुरस्कृत भी किया जाना था। शासन ने प्रचार-प्रसार के लिए पहली किस्त के रुप में 20.27 लाख रुपये का बजट दिया था। जिला प्रोबेशन विभाग से संचालित यह योजना फाइलों में कैद होकर रह गई है।
अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि पांच साल में न तो प्रचार-प्रसार किया और न ही रुपये खर्च कर पाए। रुपये खर्च नहीं करने के कारण शासन ने दूसरी किस्त का भुगतान नहीं किया। इस योजना में शहर से गांव तक बेटियों को पढ़ाने और बेटी-बेटा एक समान होने के लिए गांव-गांव में वाल राइटिंग, नुक्कड़ नाटक, बैनर, होर्डिंग लगाना था। मगर विभाग ने न तो रुपये खर्च किए और न ही धरातल पर कोई कार्य किया।
रुपये निकालने के लिए तैयार की गई थी मोटी फाइल
जिले में कन्या भ्रूण हत्या रोकने और बेटियों को शिक्षित करने के लिए अभियान भले ही नहीं चला, मगर फर्जी भुगतान करने के लिए मोटी फाइल तैयार की गई थी। हालांकि डीएम डॉ. नितिन बंसल की सख्ती के कारण यह नहीं हो सका। फिलहाल, अब विभाग शासन को धनराशि लौटाने की तैयारी कर रहा है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के लिए 20.27 लाख रुपये मिले हैं। इस धनराशि का सदुपयोग नहीं हो पाया है। यह धनराशि अभी विभाग में है। अब इसे शासन को लौटाया जाएगा। रन बहादुर सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी