अगर आप शस्त्र लाइसेंस के इच्छुक हैं तो सबसे पहले पुलिस अधीक्षक से इस बात का प्रमाण पत्र लाइए कि आपको शस्त्र चलाना आता है। बगैर इसके बात नहीं बनेगी। यह प्रमाण पत्र न सिर्फ नए शस्त्र आवेदकों बल्कि वरासत वालों को भी देना होगा। इसके लिए जिलाधिकारी ने अपने पास आए लगभग 3000 लोगों के आवेदन पुलिस अधीक्षक के पास भेज दिए हैं। प्रमाण पत्र के साथ टेस्ट में प्रयोग किए गए खोखे और उसकी रसीद भी जरूरी है।
शस्त्र के मामले में हाईकोर्ट और शासन ने जिलाधिकारियों को बहुत राहत दे दी है। अब उन्हें किसी का शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। नए शासनादेश की प्रक्रिया पूरी करने में ही लोगों के छक्के छूट जाएंगे। शौकिया असलहा रखने की चाह वाले तो वैसे ही कट जाएंगे। जरूरतमंदों की भी ख्वाहिश मुश्किल से पूरी हो सकेगी। नवीनतम शासनादेश के तहत शस्त्र आवेदक को आधार कार्ड, फिंगर प्रिंट, शस्त्र चलाने का प्रमाण पत्र, चलाई गई गोली का खोखा और खरीदने की रसीद भी डीएम के यहां जमा करनी होगी। यह प्रक्रिया नए आवेदकों के साथ वरासत वाले आवेदकों को भी पूरी करनी पड़ेगी। इसके बाद ही जिलाधिकारी आवेदन पत्रों पर विचार करेंगे।
जिले में लगभग तीन हजार लोगों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किए हैं। इनमें 264 वरासत से संबंधित हैं। बाकी नए शस्त्र आवेदक हैं। जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने इन सभी आवेदन पत्रों को नए शासनादेश का हवाला देते हुए पुलिस अधीक्षक बलिकरन सिंह यादव के पास भेज दिया है। उनसे कहा है कि वह नए शासनादेश के तहत इन आवेदकों के शस्त्र चलाने की क्षमता का परीक्षण कर उसकी रिपोर्ट भेजें। टेस्ट में जो गोली प्रयोग की गई है उसके खोखे भी जिलाधिकारी के पास पहुंचने चाहिए। हालांकि इन गोलियों की खरीद पर आने वाला खर्च आवेदकों को ही वहन करना होगा। जिलाधिकारी ने बताया कि उन्होंने किसी आवेदन पत्र को निरस्त नहीं किया बल्कि जो शासन का आदेश है उसके पालन के लिए पुलिस अधीक्षक के पास भेज दिया है। वैसे भी यह सभी आवेदन पत्र तकनीकी दृष्टि से अपूर्ण हैं। इनमें से किसी के साथ आधार कार्ड नहीं लगा है। आवेदक के फिंगरप्रिट भी नहीं लिए गए हैं। पुलिस अधीक्षक के पास से जिसकी रिपोर्ट आएगी उसके आवेदन पत्र की अन्य कमियां दूर कराई जाएंगी।