होम बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड कार्यक्रम बच्चों के लिए बनेगा संजीवनी
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। अब आशा कार्यकर्ता नवजात या शिशु ही नहीं बल्कि बड़े बच्चों की सेहत पर भी नजर रखने के साथ हाल लेंगी। लक्षण के आधार पर उन्हें डॉक्टर के पास ले जाएंगी। इलाज उपलब्ध कराने में मदद करेंगी।
बच्चों की मृत्युदर रोकने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) की तरफ से होम बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसी कार्यक्रम के तहत बड़े बच्चों को बीमारियों से बचाने और इलाज कराने की व्यवस्था की गई है।
सीएमओ डॉ. जीएम शुक्ल ने बताया कि बच्चे सबसे ज्यादा निमोनिया, डायरिया, कुपोषण समेत अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। शुरुआती लक्षणों को पहचान कर इलाज शुरू कर मृत्युदर में कमी लाने के लिए इस योजना का संचालन शुरू किया गया है। शासन का यह पहल बच्चों के लिए संजीवनी बनेगी। कार्यक्रम के तहत आशा बच्चों का वजन, लंबाई आदि लेंगी। आसपास का परिवेश देखेंगी। स्वास्थ्य एवं पोषण व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए घर पहुंचकर बच्चों की सेहत का हाल लेंगी। बच्चे को तीन, छह, आठ, 12 और 15 माह होने तक देखेंगी। अतिरिक्त गृह भ्रमणों की व्यवस्था होम बेस्ट केयर फॉर यंग चाइल्ड कार्यक्रम के तहत की गई है।