मौके पर पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों ने पिंजड़ा लगाकर दो घंटे की मशक्कत के बाद एक भालू को कैद कर लिया। उसे चिलबिला जंगल स्थित कार्यालय लाया गया। वन विभाग की तीन टीमें दूसरे भालुओं की खोजबीन जंगल में कर रही है। फिलहाल अभी कई भालू वन विभाग की पकड़ से बाहर होने का ग्रामीण दावा कर रहे हैं। जबकि प्रधान संजय यादव व अजय मौर्या का कहना है कि पकड़ा गया भालू ही कमास, संग्रामपुर, सतेवर समेत पूरे इलाके में भ्रमण कर रहा था।
ग्रामीण भी देर शाम तक भालुओं की तलाश में वन विभाग की मदद करते रहे। वन विभाग के डिप्टी रेंजर आशीष सिंह का कहना है कि पकड़ा गया भालू पालतू हैं। उसकी पूछ में सड़न है। हो सकता है कि उसे पालने वाले व्यक्ति ने ही उसे रात के समय जंगल में छोड़ दिया हो। फिलहाल अभी तक दूसरे भालुओं का पता नहीं चल सका। टीम लगातार कांबिंग कर रही है।
पौराणिक कथाओं में है जिक्र
स्थानीय लोगों के मुताबिक मोछदा नाला का पौराणिक कथाओं में जिक्र किया गया है। रामायण में इसका जिक्र तुलसीदास जी ने किया है। भगवान राम इसी रास्ते से होकर वन जाते समय यहां रुके थे और विश्राम भी किया था। इस नाले का जल कभी भी सूखता नहीं है। नदियों के सूख जाने के बाद भी यहां से पृथ्वी के अंदर से जल निकलता रहता है।
पुलिस ने कहा डायल करो 112
भालुओं का झुंड देख ग्रामीणों ने कोंहडौर थाने में फोन लगाया। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए उन्हें 112 नंबर पर फोन लगाने की नसीहत दी। भालुओं के झुंड से परेशान ग्रामीणों ने 112 नंबर पर फोन लगाया। उसके बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जानकारी के बाद भी चिलबिला व कोहड़ौर की पुलिस टालमटोल करती रही।
खौफजदा हैं ग्रामीण
भालुओं के झुंड के सतेवर, संग्रामगढ़, कमास में आने के दावों के बीच आसपास के ग्रामीण खौफजदा हैं। हर कोई अपने बच्चों को मोछदा नाले की ओर नहीं जाने दे रहा है। बड़े व बुजुर्ग भी समूहों में खेत व जंगल की ओर जा रहे हैं। हालांकि वन विभाग की टीम कई भालुओं के होने से इन्कार कर रही है। उनका कहना है कि अभी तक की छानबीन में एक ही भालू के पंजे के निशान मिले हैं। भालू को पिंजड़े में बंद करने के बाद जंगल में भी दूसरे निशान नहीं मिल रहे हैं।