विचाराधीन बंदी की मौत के बाद जेल प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। उसने जिला अस्पताल ले जाने के लिए गार्द न मिल पाने का दोष पुलिस लाइन के अधिकारियों पर लगाया। जबकि सीओ लाइंस सुधीर कुमार जायसवाल ने गार्द मांगने की बात से इनकार किया है।
एक पखवारे पूर्व जेल आने के बाद से ही रामकृष्ण तिवारी बीमार रहने लगा था। सर्दी-गर्मी के कारण उसकी सांस फूलने लगी थी। उसने तबियत खराब होने की जानकारी जेल प्रशासन को दी तो उसे साधारण दवाएं दे दी गईं। तीन दिन पहले तबीयत अधिक खराब हुई तो उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया। रविवार को उसकी हालत बिगड़ गई तो जेल के डाक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद भी उसे अस्पताल नहीं भेजा जा सका। सोमवार को मौत के बाद जेलर एके श्रीवास्तव ने बताया कि वह जेल के अस्पताल में था। डाक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर किया तो उन्होंने रविवार को पुलिस लाइन से गार्द की मांग की। वहां से इनकार कर दिया गया। तबीयत और बिगड़ने के कारण उसे जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार की सुबह फिर से गार्द के लिए पुलिस लाइन पत्र गया लेकिन वहां से फिर इनकार कर दिया गया। इसी दौरान उसकी हालत अधिक बिगड़ी और उसे जेल एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
उधर सीओ लाइंस सुधीर जायसवाल ने जेल प्रशासन द्वारा गार्द मांगने की बात से पूरी तरह इनकार किया। कहा कि कोई गार्द नहीं मांगी गई थी। अगर उन्हें गार्द नहीं मिली थी तो अधिकारियों को बताना था। अब बंदी की मौत होने के बाद लोग गलत बयान दे रहे हैं।
जेल में बंद रामकृष्ण तिवारी और उसकी पत्नी से मिलने के लिए सोमवार को उसकी बूढ़ी मां जेल आई थी। जेल प्रशासन ने उसे बताया कि राधाकृष्ण बीमार है और उसे अस्पताल ले जाया गया है। वह बहू से मिलकर वापस चली गई। उस समय तक पत्नी को भी रामकृष्ण की मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। जेल से निकलने के बाद भी मां को कोई जानकारी नहीं दी गई और वह घर चली गई। जबकि उसे सूचना देने के लिए शहर पुलिस भटकती रही।
विचाराधीन बंदी को जिला अस्पताल लाने के बाद जेल के अधिकारियों ने भर्ती दिखाने का प्रयास किया लेकिन इमरजेंसी मेडिकल अफसर ने इनकार कर दिया। ऐसे में उसे मृत लाने की बात दिखाई गई। चर्चा यह भी रही कि वह जेल में कई घंटे पहले मर गया था लेकिन जेल अधिकारी अपनी खामियां छिपाने का प्रयास कर रहे थे। अस्पताल सूत्रों की मानें तो जेल अधिकारियों के काफी प्रयास के बाद भी डाक्टर ने उनकी सिफारिश नकार दी। हालांकि जेलर एके श्रीवास्तव ने जेल के भीतर मौत होने की बात से इनकार किया है।