जिले के 50 मान्यता प्राप्त मदरसों में तैनात 152 शिक्षकों को नौकरी से बाहर कर दिया गया है। यह शिक्षक मानदेय पर तैनात थे और बच्चों को तालीम दे रहे थे। बीए पास शिक्षकों को आठ हजार और एमए पास शिक्षकों को बारह हजार रुपये प्रति माह मानदेय दिया जा रहा था। शिक्षकों के बाहर होने से प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है कि मदरसों में पढ़ाई कैसे होगी।
जिले में 160 मान्यता प्राप्त और सात अनुदानित मदरसे हैं। अनुदानित मदरसों में तैनात शिक्षकों को नियमित रूप से वेतन भुगतान किया जा रहा है। मान्यता प्राप्त 50 मदरसों में मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत 152 शिक्षकों की तैनाती की गई थी। शासन ने एक मदरसे में तीन शिक्षकों की मानदेय पर तैनात करने को कहा निर्देश दिया था। ये शिक्षक बच्चों को तालीम दे रहे थे।
शिक्षकों को दिए जा रहे मानदेय में केंद्र सरकार 60 और राज्य सरकार 40 प्रतिशत का अनुदान देती थी। केंद्र सरकार ने पांच वर्ष से अनुदान की राशि देना बंद कर दिया। जबकि राज्य सरकार की ओर से अपने हिस्से की मानदेय राशि का भुगतान किया जा रहा था। अब केंद्र की तरह राज्य सरकार ने भी मानदेय राशि देने से मना कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकार के हाथ खींचने से मदरसों में तैनात 152 शिक्षकों की नौकरी चली गई है।
अब मदरसा प्रबंधकों के सामने मदरसों में नामांकित बच्चों को शिक्षा देना चुनौती बन गया है। शिक्षा सत्र का अंतिम दौर चल रहा है, ऐसे में शिक्षकों को बाहर करने से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।
जानकारी हुई है कि शासन ने मानदेय नहीं देने का फैसला लिया है। फिलहाल अभी लिखा-पढ़ी में कुछ भी नहीं आया है। प्रबंधकों को शासन के इस फैसले से अवगत कराया जा रहा है।
- प्रभात कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी