जाति प्रमाणपत्र फर्जी मिलने पर हुए एफआईआर के आदेश को लागू न कराने को जिला पंचायत सदस्य ने प्रशासन से सात दिन की मोहलत मांगी है। उधर, दोनों की सदस्यता समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। जिला पंचायत के वार्ड एक व दो से चुनाव जीते रालोद के प्रांतीय उपाध्यक्ष मंजीत सिंह एवं गुरजीत सिंह मल्ली के जाति प्रमाणपत्र जांच में फर्जी पाए गए। उन्होंने चुनाव के समय पिछड़ी जाति के जो प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे वो तहसील से जारी नहीं किए गए थे। इस पर डीएम ने दोनों के खिलाफ एफआईआर के आदेश तहसीलदार पूरनपुर को दिए थे। हालांकि डीएम के आदेश के तीन दिन बाद भी तहसीलदार ने तहरीर पूरनपुर थाना पुलिस को नहीं दी है। इधर, जिला पंचायत सदस्य मंजीत सिंह ने प्रभारी डीएम एडीएम अजयकांत सैनी को पत्र देकर कहा है कि जाति प्रमाणपत्र के संबंध में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें हाईकोर्ट ने पांच दिसंबर को दो सप्ताह में प्रत्यावेदन दाखिल करने को कहा था। मगर अवकाश के चलते आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त नहीं हो सकी। ऐसे में एक पक्षीय कार्रवाई न्याय विरुद्ध है। उन्होंने कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति एवं प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने को एक सप्ताह का समय मांगा है। इस बाबत एडीएम अजयकांत सैनी ने बताया कि कोर्ट ने आरोपियों को कोई राहत नहीं दी है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान दोनों सदस्यों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया था वह उपस्थित नहीं हुए। इस पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया सदस्यता समाप्त करने के लिए भी विधिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।