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पीटीआर में चार गुना बढ़ी हिरनों की संख्या

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पीटीआर में विचरण करते हिरन। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। पीटीआर में बाघ ही नहीं बल्कि हिरनों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। पिछले चार सालों में हिरन की विभिन्न प्रजातियों की संख्या में चार गुना से भी ज्यादा इजाफा हुआ है। इसकी मुख्य वजह ग्रासलैंड के साथ पानी की पर्याप्त व्यवस्था है।
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चार साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो हिरनों की संख्या 7586 से बढ़कर 33232 पहुंच गई है। यही कारण है कि ग्रासलैंड क्षेत्र के तमाम जंगल मार्गों पर हिरन देखने को मिल रहे हैं। पर्यटन सत्र के दौरान पीटीआर आने वाले सैलानियों के लिए यही हिरन आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
पीटीआर में वन्यजीवों के लिए ग्रासलैंड के साथ ही पानी की पर्याप्त व्यवस्था है। इसलिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल वन्यजीवों को काफी भाता है। सीमित संसाधन होने के बाद भी वर्ष 2014 के बाद से बाघ, तेंदुए और जंगल में पाए जाने वाले कई वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है। सन 2018 में हुई गणना के बाद बाघों की संख्या 44 से बढ़कर 65 होने से पीटीआर को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान मिली। इधर 2022 में पीटीआर में चार साल के बाद वन्यजीवों की गणना के परिणाम सामने आए। इसमें पता चला कि हिरन प्रजाति से जुड़े वन्यजीवों की संख्या में चार गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ। इन प्रजातियों में चौसिंघा, पाड़ा, बारहसिंघा आदि शामिल हैं।
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विलुप्त प्रजाति चौसिंघा की संख्या भी बढ़ी
हिरन प्रजाति में चौसिंघा विलुप्त प्रजाति में आता है। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2018 में पीटीआर में चौसिंघा की संख्या सिर्फ दस थी, लेकिन चार साल में संख्या बढ़कर 110 हो गई है। इसके अलावा सांभर प्रजाति की संख्या भी 231 से बढ़कर 649 पहुंच गई है।
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प्रजाति वर्ष 2018 वर्ष 2022
पाड़ा 882 2000
चौसिंघा 10 110
सांभर 231 649
बारहसिंघा 845 1431
काकड़ 342 785
चीतल 5276 28257
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पीटीआर का माहौल हिरन प्रजाति से जुड़े वन्यजीवों को काफी भाता है। यही कारण है कि इनकी संख्या में चार गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ है।
- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीटीआर
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