पीलीभीत के डीआईओएस कार्यालय से जुड़े 1.01 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन मामले में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। बृहस्पतिवार को पुलिस ने सूचना के आधार पर आरोपी चपरासी की पत्नी अर्शी खातून को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। जबकि फरार चपरासी इल्हाम शम्सी की तलाश के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बीसलपुर निवासी इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी अर्शी खातून के खिलाफ चार दिन पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार की ओर से कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि इल्हाम शम्सी ने डीआईओएस कार्यालय से जुड़ी 1.01 करोड़ रुपये की धनराशि अपनी पत्नी के निजी बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी। यह गड़बड़ी बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों की जांच में सामने आई। मामले के उजागर होने के बाद जिलाधिकारी द्वारा गठित टीम ने प्रारंभिक जांच की, जिसमें इल्हाम शम्सी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उसे निलंबित कर दिया गया। इसके बाद डीआईओएस की ओर से चपरासी और उसकी पत्नी के खिलाफ कोतवाली में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
बृहस्पतिवार को कोतवाली पुलिस ने सूचना के आधार पर अर्शी खातून को मोहल्ला पंजाबियान स्थित उसके मायके से गिरफ्तार किया। कोतवाल सत्येंद्र कुमार के अनुसार महिला नामजद आरोपी है और उससे पूछताछ की जा रही है। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा। वहीं चपरासी इल्हाम शम्सी की गिरफ्तारी के लिए कई पुलिस टीमें लगाई गई हैं और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया गया है।
कार्रवाई की जद में कई अन्य नाम
डीआईओएस कार्यालय से जुड़े करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के इस मामले में भले ही अभी चपरासी और उसकी पत्नी पर कार्रवाई हुई हो, लेकिन जांच में डीआईओएस कार्यालय के अधिकारी व बाबुओं की भूमिका भी सामने आ रही है। इसके साथ ही कोषागार के अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण की रिपोर्ट शासन को भेज दी है और मंडलायुक्त को मंडलीय स्तर पर जांच कराने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और नामों पर कार्रवाई हो सकती है।