- शारदा के साथ ही सनेठी नदी ने इस बार नोमैंस लैंड में किया भीषण कटान
- सिंचाई विभाग ने सुरक्षा के लिए नहीं तैयार किया कोई प्रोजेक्ट
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलीनगर। तहसील क्षेत्र की रमनगरा और गुनहान क्षेत्र में जहां शारदा नदी अब भी बरसों पुराने ढर्रे पर बाएं किनारे की ओर कटान करती हुई तेज गति से बढ़ रही है, वहीं तटबंध न बनाए जाने से नोमैंस लैंड के निकट तबाही मचा रही है। दरअसल, नेपाल ने अपने क्षेत्र में तटबंध बनाकर शारदा और सनेठी नदी के फैलाव को नियंत्रित कर दिया है। लिहाजा अब नदी पीलीभीत की सीमा से भारत में प्रवेश कर तबाही मचा रही है। सिंचाई विभाग ने यहां यदि नया प्रोजेक्ट नहीं बनाया गया तो आगामी वर्ष में और भीषण तबाही होगी।
शारदा नदी की चौड़ाई पूरे जनपद क्षेत्र में तटबंध न बनने के कारण काफी अधिक हो गई है। नदी कभी दाहिने किनारे की ओर कटान करती है तो कभी बाएं किनारे की ओर। नोमैंंस लैंड से सटे इलाके तक नेपाल सरकार ने शारदा नदी पर दोनों और तटबंध बना दिया है। सनेठी नदी पर भी नेपाल ने अपने क्षेत्र में बाएं किनारे की ओर जगह-जगह तटबंध बना दिए है। इसका असर जिले की सीमा में इस वर्ष साफ दिखाई दिया।
शारदा और सनेठी ने मिलकर नोमैंस लैंड में जबर्दस्त कटान किया है। सिंचाई विभाग को यहां कटान रोकने के लिए किसी कारगर प्रोजेक्ट पर कार्य करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो सिंचाई विभाग का एक बड़ा प्रोजेक्ट जो इस इलाके में पहले से है वह आगामी वर्ष बाढ़ के समय बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो सकता है।
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तटबंध बनाने की होती रही हैं हवाई घोषणाएं
लंबे समय से शारदा नदी पर तटबंध बनाने की घोषणाएं होती चली आई हैं। बाढ़ के दौरान हवाई सर्वेक्षण कर शासन के बड़े अफसर ने यहां तक की तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भी शारदा नदी पर तटबंध बनाने की घोषणा की थी, लेकिन उसके बाद नतीजा सिफर ही दिखाई दिया। नदी हर साल कभी दाहिने किनारे की ओर कटान कर रही है कभी बाएं किनारे की ओर कटान कर रही है। इस वर्ष रामनगरा और गुनहान क्षेत्र से नदी बाएं किनारे की ओर लगातार कटान करती हुई बढ़ती जा रही है। यह नदी का पुराना ढर्रा कहलाता है। बरसों पूर्व इस इलाके को नदी छोड़ चुकी थी। कृषि भूमि रेत के ढेर में बदल गई थी और बाद में नदी दाहिने किनारे की ओर आ गई थी।वह भूमि फिर उपजाऊ हो गई और उसपर खेती हो रही है।नदी की क्षेत्र में चौड़ाई अधिक हो जाने से ट्रांस शारदा क्षेत्र में इसका असर साफ दिखाई देगा। यही कारण है कि आज तक सरकार धनारा घाट पर पुल नहीं बना सकी।