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दिवाली के बाद बढ़ी धुंध, एक्यूआई भी 150 के करीब पहुंचा

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पीलीभीत में शनिवार को दिनभर धुंध छाई रही। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में इन दिनों धुंध छाई हुई है। कुछ ऐसे ही हालात दिवाली के बाद पीलीभीत में भी देखने को मिल रहे हैं। मौसम विशेषज्ञ मान रहे हैं कि वातावरण में कार्बन के कणों की संख्या बढ़ने और नमी ज्यादा होने से धुंध बढ़ रही है। इसके बढ़ने से जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूूआई) भी 150 के करीब बना हुुआ है।
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दिवाली पर शहर की आवोहवा की गुणवत्ता पर असर पड़ा। दिवाली पर रात में शहर में एक्यूआई का स्तर 430 तो पीएम-2.5 का आंकड़ा 160 और पीएम-10 की मात्रा 320 माइक्रोमीटर पहुंच गई थी। दिवाली के अगले दिन स्थिति कुछ बेहतर हुई थी। लेकिन पिछले दो दिनों से फिर हालात बिगड़ने लगे। मौसम विशेषज्ञ इसका बड़ा कारण नमी बढ़ने के साथ वातावरण में कार्बन के कणों को बढ़ना मान रहे हैं। दिवाली पर छोड़े गए पटाखों और पराली जलाने से कार्बन के कण बढ़ेे हैं। उसी के चलते धुंध बढ़ी है। शुक्रवार को जिले का एक्यूूआई 150 के करीब रहा। इसके अलावा पीएम 2.5 की मात्रा 41 और पीएम-10 की मात्रा 125 माइक्रोमीटर रही। वातावरण में नाइट्रोजन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड की मात्रा भी बढ़ी है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएस ढाका के अनुसार दिवाली के बाद से कार्बन के कण वातावरण में बढ़े हैं। पटाखों के साथ-साथ पराली जलना भी इसकी एक वजह हो सकती है। पराली जलाने से भी कार्बन के कणों में बढ़ोतरी होती है। उन्होंने बताया कि तीन- चार दिन में धुंध हट जाएगी।
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कुछ दिन सुबह टहलने बचें बुजुर्ग
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर बताते हैं कि सेहत के लिए स्वच्छ हवा बेहद जरूरी है। धुंध में तमाम हानिकारक कण होते हैं। खासतौर से सुबह के वक्त नमी ज्यादा होने से यह कण वातावरण के निचले स्तर पर आ जाते हैं। बुजुर्गों और बच्चों की सेहत को धुंध ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए इन दिनों लोग मॉर्निंग वॉक से परहेज करें। जिन लोगों को हृदय संबंधी या अस्थमा है तो उनको और एहतियात रखने की जरूरत है।
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सेहत के लिए बहुत खतरनाक है धुंध
धुंध सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। सबसे ज्यादा असर आंखों पर पड़ता है। इसकी वजह से आंखों में जलन और एलर्जी हो सकती है। डॉ. रमाकांत के अनुसार धुंध में मौजूद कणों के चलते खांसी, ब्रोंकाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। हृदय रोग, त्वाचा रोग, सांस लेने में दिक्कत, नाक,कान, गले और में इंफेक्शन हो सकता है। अगर किसी को अस्थमा या श्वांस संबंधी रोग है तो उनको ज्यादा दिक्कत हो सकती है।
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