शारदा डैम के किनारे सींक घास ले जातीं महिलाएं। संवाद
कलीनगर। तराई में जंगल से सटे इलाके में कुछ दिनों से बाघों की सक्रियता बढ़ गई है। इसको लेकर विभाग की ओर से सतर्कता बरतने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दावों के बीच ग्रामीण जान जोखिम में डालकर जंगल क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी वाले स्थानों पर जाकर सींक घास (झाड़ू बनाने वाली घास) निकालने में जुटे हैं। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बनी हुई है। रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि जंगल और डैम के बीहड़ क्षेत्र में इंसानों की घुसपैठ रोकने के लिए वनकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं।
महोफ और बराही रेंज की सीमा से सटे इलाके में स्थित शारदा डैम और उससे सटे जंगल क्षेत्र में वैसे तो हर समय बाघ समेत हिंसक वन्यजीवों की मौजूदगी बनी रहती है, लेकिन एक माह पूर्व से डैम के अलावा उससे सटे आबादी क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी बढ़ी है।
पूर्व में एक बाघ नगरिया खुर्द कला तक पहुंच गया था। इसके अलावा पुरैना गांव की सीमा में भी बाघ ने दो पशुओं को मार दिया था। इसके बाद विभाग की ओर से सतर्कता बरतने का दावा किया गया, लेकिन सतर्कता के बीच ग्रामीण जान जोखिम में डालकर डैम के बीहड़ क्षेत्र में घुसकर खड़िया घास की सींक लाने में जुटे हैं।
सींक से झाड़ू बनाने का कार्य किया जाता है। बीहड़ क्षेत्र में पुरुषों के साथ महिलाएं भी जा रही हैं। सींक एकत्र कर ग्रामीण डैम के रास्ते से ही लेकर जा रहे हैं वहीं वनकर्मी अंजान बने हुए हैं। रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि जंगल और डैम के बीहड़ क्षेत्र में इंसानों की घुसपैठ रोकने के लिए वनकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं।