पीलीभीत। जिला अस्पताल में फिटनेस सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर 200 से 500 रुपये तक की वसूली की जा रही है। बुधवार को वायरल हुए एक वीडियो से इसकी पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची हुई है। मामला संज्ञान में आने के बाद सीएमओ ने जांच के आदेश दिए हैं।
फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर रिश्वत लेने के दो वीडियो वायरल हुए हैं। एक वीडियो में डॉक्टर के कक्ष में खड़े कुछ युवक फिटनेस सर्टिफिकेट बनाने की बात कह रहे हैं। सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर युवकों से रिश्वत मांगी जा रही है। एक-दो युवकों के रुपये देने पर एक स्वास्थ्यकर्मी द्वारा प्रमाणपत्र बना दिया जाता है। वीडियो में प्रमाणपत्र देने से पूर्व कक्ष के एक कोने में जाकर स्वास्थ्यकर्मी 200 रुपये लेता साफ दिख रहा है।
दूसरे वीडियो में ईसीजी कराने के नाम पर युवकों से रुपये मांग जा रहे हैं। एक युवक सौ रुपये देने को राजी हो जाता है, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी अन्य को भी देने की बात कहकर अधिक की मांग करता है। दोनों मामलों की वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। अफसर जांच कराने की बात कह कर पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
रोजाना 30-40 युवा आते हैं प्रमाणपत्र बनवाने
सेना, पुलिस व अन्य सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए युवाओं को फिटनेस सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है। नियम है कि पहले आवेदन किया जाता है। इसके बाद डॉक्टर जांच करते हैं। जांच में फिट पाए जाने पर सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों ने युवाओं की मजबूरी को कमाई का जरिया बना लिया। फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए फार्म भरने के बाद युवा को पहले ईसीजी कराना पड़ता है।
यहां डॉक्टर की मर्जी जरा सी भी छेड़छाड़ कर अनफिट कर दें तो कोई चुनौती नहीं दे सकता। वसूली के लिए चतुर्थश्रेणी कर्मचारी को लगाया गया है। यही कारण है कि यह चतुर्थश्रेणी कर्मचारी खुलेआम वसूली करता है और डॉक्टर आंखें बंद करे बैठे रहते हैं। फिजिशियन और ईसीजी करने वाले डाक्टर को इस बारे में पता नहीं यह बात लोगों का हजम नहीं हो रही।
वीडियो संज्ञान में आया है। इसकी जांच के आदेश दिए गए है, जल्द कार्रवाई को भी अमल में लाया जाएगा। - डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ
वायरल वीडियो के मामले में जांच की जा रही है । यह पता लगाया जाएगा कि किसकी शह पर रिश्वत ली जा रही थी। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- बीएस यादव, प्रभारी सीएमएस