कलीनगर। परशुरामपुर गोआश्रय स्थल में गोवंश की मौतों का सिलसिला थम नहीं पा रहा है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. अरविंद कुमार के निरीक्षण कर लौटते ही दो और गोवंश की मौत हो गई।
गोवंश की मौत के साथ ही प्रशासन के दावों की भी पोल खुल गई है। बृहस्पतिवार को निरीक्षण के दौरान सीवीओ ने महज एक ही गोवंश के बीमार होने की बात कही थी। ऐसे में उनके जाते ही दूसरे गोवंश की मौत कैसे हो गई। इसका जवाब अधिकारियों के पास नहीं है। पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव परिसर में ही गड्ढा खोदकर दबा दिए गए।
माधोटांडा ग्राम पंचायत के मौजा परशुरामपुर स्थित गोआश्रय स्थल में प्रशासन गोवंश को भरपेट चारा देने और बीमार गोवंश का समय पर इलाज कराने का दावा कर रहा है। हाल ही में गोआश्रय स्थल गोवंश की लगातार मौतों से सुर्खियों में आया तो अधिकारियों में खलबली मच गई। बृहस्पतिवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद कुमार निरीक्षण करने पहुंचे।
उन्होंने अधिकारियों को भेजी रिपोर्ट में सब कुछ ठीकठाक होने का दावा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गोआश्रय स्थल में भरपूर चोकर मौजूद है। महज एक पशु बीमार है। सीवीओ की रिपोर्ट को 24 घंटे भी नहीं बीते कि दो गोवंश की मौत से सच्चाई सामने आ गई। एक पशु ने बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे और दूसरे ने शुक्रवार तड़के चार बजे दम तोड़ा। बता दें कि छह और आठ अगस्त को भी एक-एक गोवंश की मौत हुई थी। इससे पहले आठ गोवंश दम तोड़ चुके हैं।
भरपेट चारा-चोकर और इलाज मिल रहा तो क्यों मर रहे पशु
परशुरामपुर आश्रय स्थल में लगातार गोवंश की मौत से प्रशासनिक अधिकारी कटघरे में खड़े दिखाई दे रहे हैं। गोवंश की मौतों पर पर्दा डालने के लिए आश्रय स्थल में पशुओं की क्षमता को लेकर भी शासन को गुमराह किया जा रहा है। अधिकारी 60 पशु मानकर उनके खाने के लिए 60 हजार रुपये जुलाई में खर्च करने का दावा कर रहे हैं। साफ है कि सरकार द्वारा दिए जा रहे 30 रुपये प्रति गोवंश पर खर्च किए जा रहे हैं। एक समय के चारे पर 15 रुपये खर्च हो रहे हैं। इसमें गोवंश को भरपेट चोकर, भूसा व चारा दिया जा रहा है।
दूसरी तरफ खुद रिपोर्ट में लिखा जा रहा है कि दो एकड़ में हरा चारा उगाया जा रहा है, जो एक सप्ताह में तैयार हो पाएगा। ऐसे में हरा चारा कहां से आ रहा है, यह कोई बताने वाला नहीं है। सवाल यह है कि अगर प्रशासन की रिपोर्ट ठीक है और गोवंश को हरा चारा, चोकर, भूसा व पर्याप्त इलाज मिल रहा है तो एक-एक करके गोवंश क्यों मर रहे हैं।
दो और गोवंश की मौत हुई है। कमजोरी व वृद्धावस्था के कारण दोनों गोवंश मरे हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव को दफना दिया गया है। - डॉ. नुरुल हुदा, पशु चिकित्सा अधिकारी माधोटांडा।