पीलीभीत। किसान सम्मान निधि में घपला रोकने के लिए अब लाभार्थियों सूची के साथ उसकी भूमि का मिलान भू-अभिलेखों से कराया जा रहा है। इसके लिए उपनिदेशक कृषि ने लाभार्थियों की सूची सभी तहसीलों के एसडीएम को भेज दी है। भू-अभिलेखों का रिकॉर्ड सामने रखकर कर सूची में किसानों की जमीन दर्ज कराके डेटा अपडेट किया जाएगा। अब भू-अभिलेखों से सम्मान निधि के डाटा का सत्यापन किया जाना है। इसके लिए तहसील मुख्यालयों पर लेखपालों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
जनपद में सरकारी योजनाओं में किस तरह गड़बड़झाला हो रहा है। इसका एक उदाहरण किसान सम्मान निधि के सत्यापन की रिपोर्ट में सामने आया है। सम्मान निधि 358 ऐसे किसानों के नाम जाती रही, जिनके नाम पर एक बीघा जमीन नहीं थी। अब इन किसानों से धनराशि वापस मांगी जा रही है। साथ ही धनराशि का हस्तांतरण रोकने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अगर किसान धनराशि कृषि विभाग के खाते में वापस नहीं करते हैं तो शासन के निर्देश पर विधिक कार्रवाई होगी और इसमें एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि 2018 में शुरू हुई थी। एक वर्ष में तीन किश्तों में छह हजार रुपये भेजे जाते हैं। सम्मान निधि के लिए तीन लाख से अधिक किसान पात्र थे। उपनिदेशक कृषि प्रसार देवेंद्र सिंह ने बताया कि सोशल ऑडिट में अपात्र किसान पाए गए हैं। इन्हें धनराशि क्यों दी जा रही थी? इस सवाल पर जवाबदेही कैसे तय होगी? उन्होंने कहा कि इस संबंध में शासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा।
राजस्वकर्मियों ने क्यों नहीं रुकवाई निधि
बेशक लोगों ने खुद को किसान बताकर अपना डाटा सम्मान निधि के पोर्टल पर भरा होगा लेकिन राजस्वकर्मी ने जब सत्यापन किया तो भुगतान रुकवाने की प्रक्रिया क्यों नहीं की गई। पूरनपुर तहसील में सबसे अधिक 108 भूमिहीन किसानों के नाम पर सम्मान निधि भेजे जाने का रिकॉर्ड सामने आया है। इसके अलावा बिलसंडा में 96, बीसलपुर में 74, बरखेड़ा में 15, अमरिया में 10, ललौरीखेड़ा में नौ, मरौरी में 46 भूमि किसानों को सम्मान निधि का लाभ दिया गया है।
कलीनगर तहसील के 17 गांवों में चल रहा है सत्यापन
कलीनगर। तहसील क्षेत्र के 17 राजस्व गांवों में सम्मान निधि की सूची के आधार पर राजस्वकर्मी और कृषि विभाग के कर्मचारी सत्यापन कर रहे हैं। इसकी रिपोर्ट एक-दो दिन में आएगी। इसमें अपात्र बड़ी संख्या में पाए जाने का अंदेशा है। क्योंकि पहले सत्यापन के बगैर धनराशि जारी होती रही है।