कलीनगर (पीलीभीत)। शहर के नजदीक देवहा नदी के क्षेत्र से पिंजरे में कैद हुई बाघिन को आखिरकार कानपुर चिड़ियाघर भेज ही दिया गया। बाघिन की सेहत को देखते हुए अमर उजाला शुरू से ही उसके चिड़ियाघर भेजे जाने की संभावना जताता आ रहा था। शनिवार तड़के सामाजिक वानिकी की टीम उसे लेकर रवाना हो गई। यहां बता दें कि सात दिन से पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर के आवास पर बाघिन को रखा गया था।
कलीनगर के अटकोना गांव से 26 जनवरी को बाघिन को एक घर से रेस्क्यू किया गया था। सेहत को लेकर शुरुआती अटकलों के बीच अफसरों के निर्देश पर कॉलर आईडी लगाकर एक जनवरी को बाघिन को पीटीआर के घने जंगल में छोड़ा गया था, लेकिन बाघिन जंगल में रुकने के बजाय फिर आबादी क्षेत्र की ओर पहुंच गई। 11 जनवरी को शहर के नजदीक एक होटल के निकट बाघिन की मौजूदगी देखी गई थी। इसके बाद से लगातार बाघिन देवहा नदी के किनारे अपनी मौजूदगी दर्ज कराए थी। यहां भी बाघिन के कमजोर होने की बात सामने आई थी। इसके बाद अफसरों ने इस्लामनगर क्षेत्र में पिंजरा लगाया था।
छह दिन पूर्व बाघिन पिंजरे में कैद हो गई थी। अफसरों के निर्देश पर डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल के आवास पर पिंजरे में कैद बाघिन को रखा गया था। चिकित्सकों की जांच में बाघिन की गर्दन में घाव और उसकी सेहत कमजोर होने की बात सामने आई थी। इसके बाद तीन सदस्यीय चिकित्सकों की टीम उपचार में जुटी थी।
उधर, बाघिन की स्थिति को परखने के लिए ब्लड सैंपल आईवीआरआई भेजे गए थे। शुक्रवार को रिपोर्ट सामान्य आने के बाद रिपोर्ट पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ को भेजी गई। शनिवार की सुबह आदेश मिलने के बाद बाघिन को कानपुर के चिड़ियाघर भेज दिया गया। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि अफसरों के निर्देश के बाद शनिवार की सुबह सामाजिक वानिकी के एसडीओ अंजनि कुमार के नेतृत्व में टीम बाघिन को लेकर चिड़ियाघर रवाना हो गई। डॉ. एसके सिंह व दक्ष गंगवार भी टीम में मौजूद रहे।
बाघिन को कम उम्र में मिली उम्रकैद की सजा
कलीनगर। जंगल के प्राकृतिक वातावरण से दूर गन्ने को ठिकाना बनाना बाघिन को भारी पड़ गया। लगातार आबादी क्षेत्र में चहलकदमी करने की वजह से बाघिन को दो बार पकड़ना पड़ा। इस दौरान विभिन्न कारणों से बाघिन की सेहत में भी बदलाव आए। इसको लेकर बाघिन को चिड़ियाघर भेजना पड़ा। करीब ढाई से तीन साल की उम्र में उम्रकैद की सजा बाघिन को भुगतनी पड़ेगी।