बाघों के जंगल से मैदानी क्षेत्रों में हो रही आमद पर यदि प्रदेश सरकार ने तत्काल ठोस उपाय नहीं किए तो दो माह बाद टाइगर रिजर्व की प्रत्येक रेंज क्षेत्र से बाघ बाहर निकलने लगेंगे। जानकारों के मुताबिक इसकी वजह गन्ने की फसल तैयार होना बताया जा रहा है। जो जंगल से सटे इलाकों से लेकर मैदान इलाकों तक फैली है। यदि नहीं चेते तो टाइगर रिजर्व प्रशासन के लिए गत वर्ष की तरह ही खासी मशक्कत करनी होगी। जिले में इस बार गन्ने का रकबा बढ़ा है। ऐसे में अधिकतर किसानों ने वन्यजीवों से कृषि फसलों को बचाने के लिए जंगल से सटे इलाकों से लेकर मैदानी इलाकों तक गन्ना लगाया है। जो अब धीरे-धीरे तैयार होता जा रहा है। ठंड शुरू होते ही जहां नीलगाय व जंगली सुअर जंगलों से निकलकर गन्ने के खेतों की ओर रुख करते हैं, वहीं कड़े शिकार के नियमों के चलते किसान अपनी गन्ने की फसलें भी ठीक से नहीं बचा पाते। जानकारों के मुताबिक जब नीलगाय व जंगली सुअर गन्ने के खेतों में आते हैं तो बाघ भी शिकार की तलाश में उनका पीछा करते हुए बाहर आते हैं। आसानी से शिकार मिल सके, इसको लेकर बाघ गन्ने के खेतों व नहरों की झाडिय़ों में ही अपना ठिकाना बना लेते हैं।