तराई क्षेत्र के गांवों में करीब एक माह से बाघ की चहल कदमी से लोग दहशत में हैं। बुधवार की रात बाघ ने गांव अर्जुनपुर निवासी गुरुदयाल सिंह की पशुशाला में घुसकर बछड़े पर हमला किया था। शोर-शराबा पर बाघ भाग निकला था, लेकिन बछड़े की कुछ देर बाद मौत हो गई थी। इधर, बृहस्पपतिवार की शाम को अर्जुनपुर से कुछ दूरी पर गांव कीरतपुर निवासी राणा सिंह की पशुशाला में घुसे बाघ ने पड्डी पर हमला कर दिया। शोर-शराबा होने पर बाघ पड्डी के शव को खींचकर गन्ना के खेत में ले गया। सूचना पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। राणा सिंह ने बताया कि बाघ दूसरे दिन शुक्रवार को भी खेत में डेरा जमाए रहा। खेत के समीप पहुंचे वनकर्मियों को देखकर बाघ ने दहाड़ लगा दी। इस पर वनकर्मी दहशत के चलते भाग खड़े हुए। राणा सिंह ने बताया कि अर्जुनपुर में बाघ की चहल कदमी पर लोगों के शोर-शराबा कर बाघ को खदेड़ने पर बाघ उनकी ओर आया है।