जंगल से निकलकर बाघ सड़क पर आकर बैठ गया। इसके बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई। इसकी सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम हाथियों के साथ पहुंची, लेकिन तब तक बाघ जंगल में जा चुका था। इधर सामाजिक वानिकी के डीएफओ की देखरेख में टीम खेतों में कांबिंग करने में जुटी रही। कई दिनों से जंगल से लगे इलाकों में बाघ की चहलकदमी हो रही है। शुक्रवार को बराही रेंज से निकल कर बाघ पूरनपुर-तराही मार्ग पर गांव कीरतपुर के समीप सड़क पर आकर बैठ गया। तराई क्षेत्र से स्कूलों को आ रहे विद्यार्थी और राहगीर सड़क पर बाघ बैठा होने का पता लगते ही सहम गए। क्षेत्र में बाघ की दहशत फैल गई। इसकी सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम हाथियों पर सवार होकर मौके पर पहुंची, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही बाघ जंगल की ओर निकल गया। उधर, कीरतपुर, अर्जुनपुर, भीमपुर में बाघ की पिछले कुछ दिनों से हो रही चहल कदमी पर निगरानी को लगी टीम ने सामाजिक वानिकी के डीएफओ आदर्श कुमार की देखरेख में क्षेत्र के खेतों में हाथियों पर बैठकर कांबिंग की, लेकिन बाघ का तीसरे दिन भी पता नहीं लग सका। डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल ने बताया कि दो स्थानों पर बाघ के पद चिह्न मिले हैं।