वाचर ताराचंद्र की मौत वन विभाग और गांव वाले बाघ के हमले में होना मान रहे हैं लेकिन मौके पर उसके एक बराबर कटे पैरों के अलावा शव का अवशेष भाग न मिलना हत्या का संदेह पैदा कर रहा है। वहीं घटना को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। टाइगर रिजर्व में करीब ढाई साल से तैनात वॉचर रोज की तरह ड्यूटी पर था। मंगलवार को जंगल में उसके पैर मिले जो बाघ द्वारा छोड़े गए बताए जा रहे हैं। यह दोनों पैर एक बराबर हैं अथवा उनकी लंबाई बराबर है। ऐसे में सवाल उठाता है कि क्या बाघ या कोई वन्यजीव किसी के हाथ पैरों को नापकर काटता है। वहीं दूसरा सवाल यह है कि जब पैर मिल गए तो ताराचंद के शरीर का बाकी भाग (अवशेष) क्यों नहीं मिला। यदि बाघ ने ताराचंद को शिकार बनाया है तो कम से कम सिर एवं कॉलर बोन अथवा कुछ मांस, खाल आदि मिलना चाहिए। यदि बाघ शव को दूर घसीट कर ले गया तो पैर काटने के बाद ले गया। हैरानी की बात यह है कि सीओ जहानाबाद निशांक शर्मा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल भी मौके पर मौजूद था लेकिन पुलिस ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं दूसरी ओर वन विभाग की कार्रवाई भी पूरी तरह संदिग्ध है। डीएफओ कैलाश प्रकाश के अनुसार शाम लगभग करीब चार बजे वन क्षेत्राधिकारी ने आग लगने की सूचना ताराचंद को देकर मौके पर भेजा था। ऐसे में सवाल उठता है कि रेंजर ने स्वयं आग लगे स्थल पर जाना उचित क्यों नहीं समझा, साथ ही किसी अन्य स्टाफ को मौके पर भेजने एवं डीएफओ को इसकी सूचना देने की जरूरत महसूस क्यों नहीं की। इसके अलावा मृतक के पुत्र ने जो तहरीर न्यूरिया पुलिस को दी है उसके अनुसार वाचर के साथ फारेस्टर प्रेमपाल, मूलचंद्र व छोटेलाल भी थे जबकि अधिकारी इससे मना कर रहे हैं। इस बाबत डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि ताराचंद को बाघ ने हमला कर मारा है। मौके की स्थिति देखकर ऐसा स्पष्ट हो गया है। जमीन पर पत्ते अधिक पड़े होने के कारण पदचिह्न नहीं मिले हैं लेकिन बरामद पैर बाघ द्वारा नोंचकर काटे गए हैं।