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तीन ग्राम पंचायतों में हुए घपले, प्रधानों से गबन की धनराशि नहीं हो सकी वसूल

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पीलीभीत। जिले की तीन ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां विकास कार्यों में घपलेबाजी हुई। ग्रामीणों की शिकायत पर जांच समिति बनी और घपले की पुष्टि जांच समिति ने कर दी। इसके बाद जिलाधिकारी ने गबन की धनराशि की वसूली के लिए नोटिस जारी कराए लेकिन ग्राम प्रधानों से वसूली नहीं की जा सकी। जबकि रकम जमा न करने पर भू-राजस्व की भांति वसूली का प्रावधान है।
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जिला पंचायत राज अधिकारी वाचस्पति झा से जब इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल में ही ज्वाइन किया है। यह प्रकरण उनके कार्यकाल से पहले के हैं। सभी प्रकरणों की पत्रावली तलब कर ली है। धनराशि जमा करने के लिए नए सिरे से प्रधानों को एक-एक नोटिस और जारी किया जाएगा लेकिन अगर कोई तत्कालीन ग्राम प्रधान रुपये जमा नहीं करता है तो उससे भू- राजस्व की भांति वसूली किए जाने का प्रावधान है। इसका पालन कराने के लिए आरसी जारी कराएंगे।
बरखेड़ा विकास खंड की ग्राम पंचायत बढ़ेरा विकास कार्यों में घपले बाजी पकड़ी गई और जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान तथा पंचायत सचिव से गबन की धनराशि वसूली के आदेश दिए। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को 99113 रुपये अलग अलग जमा करने थे। पंचायत सचिव रामप्रकाश के वेतन से कटौती की जा रही है। मौजूदा प्रधान देवपाल से अभी तक वसूली नहीं की गई। इस गांव में पशु शेड बनाने में घपलेबाजी हुई थी।
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मरोरी विकास खंड के न्यूरिया खुर्द ग्राम में 2015-2020 के बीच विकास कार्य में घपलेबाजी हुई। तालाब के चारों ओर पिलर लगाकर तार खींचे जाने थे। इस कार्य में घपलेबाजी की गई थी। तत्कालीन प्रधान नरेंद्र सिंह और तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी से 63,000-63,000 रुपये की वसूली होनी थी। इसमें ग्राम प्रधान से विभाग वसूली नहीं कर सका। तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी का निधन हो चुका है। इसलिए उनके विरुद्ध कार्रवाई बंद कर दी गई। प्रधान को वसूली के लिए बार-बार नोटिस भेजा जा रहा है।
मरोरी विकास खंड के गांव सैदपुर में तत्कालीन प्रधान और पंचायत सचिव को गबन की धनराशि जमा करने के आदेश दिए गए थे। दोनों को 99922 रुपये जमा करने थे। पंचायत सचिव अमित कुमार सिंह ने अपने हिस्से के 99922 रुपये जमा कर दिए हैं लेकिन तत्कालीन ग्राम प्रधान किरन सोनकर ने रुपये जमा नहीं किए हैं। तत्कालीन प्रधान को पहला पत्र 17 जुलाई को लिखा गया। एक वर्ष से ज्यादा हो गया वसूली नहीं हो सकी। पंचायत राज विभाग सिर्फ पत्र जारी करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहा है।
अवर अभियंताओं की नहीं तय की गई जिम्मेदारी
ग्राम पंचायतों में धनराशि खर्च करने के लिए अवर अभियंता एस्टीमेट बनाते हैं। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव तकनीकी जानकारी नहीं रखते है। मेजरमेंट करने वाले अवर अभियंता को भी इस मामले में उत्तरदायी माना जाना चाहिए था लेकिन इसकी अनदेखी की गई। जब जिला पंचायतराज अधिकारी से इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे पूरी पत्रावली देखेंगे। अगर ऐसा हुआ तो जिलाधिकारी के संज्ञान में लाएंगे तभी आगे की कार्रवाई होगी।
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