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‘बिन नमाज के रोजा होता फाका’

Mon, 13 Jun 2016 11:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
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स्वागत - फोटो : pilibhit, beureu
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शहर की जामा मस्जिद में जश्ने तरावीह मनाई गई, जिसमें कौम और मिल्लत के लिए दुआ की गई।
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पवित्र रमजान के छठे रोजे की सातवीं तरावीह पर रविवार देर शाम शाही जामा मस्जिद में हुए कार्यक्रम में इमाम संगठन के जिलाध्यक्ष हाफिज हाजी इसरार अहमद अशरफी ने इस्लाम की मुकद्दस किताब में से 114 आयतें करीमा पढ़कर 20 रकअत की सुन्नत नमाज अदा कराई। साथ ही हाफिज द्वारा पढ़ी जा रही आयतों में कोई शब्द कम बढ़ न हो, इसलिए हर तरावीह सुनाने वाले इमाम के पीछे एक समाअती इमाम भी मौजूद रहे। जिसके लिए बीसलपुर के मोहम्म आरिफ ने समाअत किया। रविवार रात ईशा की नमाज से पहले इसरार अहमद अशरफी व समाअती मोहम्मद आरिफ  की दस्तारबंदी की गई। इस पर हाफिज इसरार व समाअती मोहम्मद आरिफ  को नजराना दिया गया। साथ ही शाही जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज ओ कारी इजहार अहमद बरकाती को नजऱाना कमेटी ने नजराना पेश किया। दस्तार बंदी के रस्म के बाद नमाजे ईशा अदा की गई। इसके बाद नमाजे तरावीह अदा की गई। इस्लामिक मुकद्दस किताब की आखिरी पारा आम की आखीरी आयतों के साथ तरावीह का समापन हुआ। हाफिज इजहार अहमद बरकाती ने देश, कौम व मिल्लत की सलामती के लिए दुआ मांगी। तरावीह सुना रहे हाफिज इसरार अशरफी ने कहा कि बहुत से लोग रोजा तो रख लेते हैं, लेकिन नमाज नहीं पढ़ते। ऐसे लोगों का रोजा अल्लाह के घर फाका लिखा जाएगा। रोजा तभी मुकम्मल माना जाएगा, जब हम पांच वक्त की नमाज और तरावीह अदा करें। इस मौके पर डीएम मासूम अली सरवर, सैयद आसिफ अली कादरी, मास्टर सखावत, हाफिज फईम, हाफिज अकील, हाफिज नईम, सैयद मखदूम, हाफिज शब्बन, इखलास अहमद, जुफ्किार, फिरोज खां, नाहिद खां, अकबर अहमद, सलीम रीगल, सिराज खां, शाहिद हुसैन, ब्लड बैंक के गुलाम रसूल आदि मौजूद रहे।
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