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ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा

Sun, 05 Mar 2017 11:46 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
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ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा
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रंपुरा गांव में बीएससी के छात्र ब्रह्म स्वरूप की बाघ के हमले में मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। वन विभाग के कर्मचारियों से गांव के लोगों ने कई बार मारपीट की। खास बात यह कि दूसरी बार मारपीट के दौरान अफसर और काफी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा लेकिन कर्मचारियों को दौड़ाकर पीटा गया। रविवार सुबह घटना के बाद से ही भीड़ का गुस्सा वन विभाग के खिलाफ फूटने लगा था। छात्र ब्रह्मस्वरूप का शव बाहर निकाले जाने के बाद ही वन विभाग की टीम के कई कर्मचारियों की पिटाई कर दी गई। उन्हें बचाने में मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर न्यूरिया मोहम्मद कासिम भी घायल हो गए थे। इसके बाद मौके पर पुलिस बल को बुला लिया गया। जिले के दस थानों का पुलिस बल मौके पर बुलाया गया। सीओ सिटी अनुराग दर्शन, सीओ बीसलपुर हरीश भदौरिया भी आ गए। सबसे पहले सीओ सिटी ने खुद खेत के भीतर जाकर बाघ को तलाशा। ग्रामीणों के इस दौरान शांत रहने पर अफसर फोर्स और शांति व्यवस्था को लेकर संतुष्ट हो गए और लोगों को समझाने में जुट गए। पहले भी कई बार बाघ के हमले के बाद मारपीट व पथराव हो चुका है। इसके बावजूद मौके पर फोर्स आधी अधूरी तैयारी से पहुंची। हेलमेट, बाडी प्रोटेक्टर आदि किसी के पास नहीं था। वन विभाग के अफसर पहले ही इधर-उधर खिसक लिए। कुछ देर में ही बिना तैयारी के पहुंची पुलिस भी टुकड़ियों में बंटकर रह गई। पुलिसकर्मी खुद को भीड़ के आगे बेबस समझ शांति व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान देने से अधिक खुद को बचाने में लगे रहे। नतीजतन जो कयास लगाए जा रहे थे वही हुआ। अफसर तहरीर लिखाने में व्यस्त हो गए, इधर ग्रामीणों की भीड़ ने अकेले रह गए वन विभाग के वन दरोगा देवी सिंह और प्रेमपाल पर हमला कर गन्ने से दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। मौके पर कई थानों की फोर्स मौजूद थी, लेकिन सब बिखरी हुई थी। किसी ने उन्हें बचाने का प्रयास किया तो वह भी भीड़ के आगे नहीं टिका। हालांकि बाद में सीओ सिटी अनुराग दर्शन ने मोर्चा संभालते हुए वनकर्मियों को अपने संरक्षण में जैसे तैसे लिया। ट्रैक्टर पर खड़े होकर हमला होने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी लेकिन इसका ज्यादा असर भीड़ पर नहीं दिखा। ग्रामीणों का निशाना बन चुके वनकर्मी काफी सहमें दिखे और वन विभाग के अधिकारी दूर खेत में खड़े होकर खुद को बचाते रहे। इसके बाद सुरक्षा के लिहाज से यूपी 100 डायल की भी कई गाड़ियां मौके पर बुला ली गई। बाघ के हमले के बाद ग्रामीणों के गुस्से का पता लगने के बाद भी पुलिस का आधी अधूरी तैयारी से पहुंचना लापरवाह नजरिए को उजागर करता दिखा। 
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