पीलीभीत। निरंजनकुंज में हरे भरे आम के बाग का कटान होने के मामले में अल्पसंख्यक विभाग ने जमीन को लेकर अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपी है। इसमें कहा गया है कि जमीन निजी संपत्ति है। वह वक्फ संपत्ति नहीं है। वक्फ के अलग तीन गाटा हैं। इधर, पेड़ का सफाया कर कॉलोनी बनाने के मामले में डीएम कॉलोनाइजरों और जमीन के मालिकाना हक के बीच संबंधों को लेकर पड़ताल करा रहे हैं।
छह दिसंबर को उद्यान विभाग की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीएफओ संजीव कुमार ने आम का बाग कटाने की अनुमति दे दी थी। इसके बाद शाहजहांपुर की लेबर ने मंगलवार रात से ही कटान शुरू कर दिया था। बुधवार को जब मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया तो कटान को मौके पर रुकवा दिया गया था। इधर, आम का बाग वक्फ बोर्ड की जमीन पर होने की चर्चा हुई तो संबंधित विभाग के लोगों ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी थी। मामले को लेकर डीएम ने वक्फ बोर्ड से जमीन को लेकर रिपोर्ट मांगी थी।
डीएम को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीन वक्फ बोर्ड की नहीं है। इस पर ही कटान की अनुमति दी गई थी। अब यह जमीन ग्रीन बेल्ट की या नहीं, यह मामला विनियमित क्षेत्र की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अवैध कटान में किसकी भूमिका, इसकी हो रही पड़ताल
पेड़ों का सफाया करवाने के बाद वहां पर कॉलोनी को विकसित करने की पूरी तैयारी है। इसमें कौन-कौन शामिल हैं और कटान की अनुमति दिलाने मेें किसकी भूमिका है। इसकी भी डीएम की ओर से पड़ताल कराई जा रही है। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि जमीन के स्वामी और कॉलोनाइजरों के बीच क्या संबंध है।
जमीन को लेकर अभिलेखों की जांच कराई गई थी। इसमें जहां पर पेड़ काटे गए, वह वक्फ बोर्ड की जमीन नहीं है। जमीन निजी संपत्ति है। इस जमीन के दूसरी ओर तीन गाटा वक्फ संपत्ति के हैं। रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी गई है।- रोहित सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी