पीलीभीत। कॉलोनाइजर और सपा नेता नफीस अहमद ने नजूल की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया था। कॉलोनी बनाकर लोगों को बेच दी। 2015 में लेखपाल ने नफीस समेत छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक ने जांच पूरी करने बाद छह लोगों मुकदमे से निकाल दिया। सिर्फ नफीस के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मंगलवार का सीजेएम कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए सपा नेता नफीस को जेल भेज दिया।
नफीस अहमद ने 2015 में नकटादाना चौराहे के पास पड़ी कई बीघा नजूल की जमीन को अपनी कॉलोनी में शामिल कर लिया था। यहां प्लाटिंग कर जमीन को बेच दिया गया। मामला संज्ञान में आने के बाद प्रशासन ने अवैध कब्जा कर बनाए आवासों को बुलडोजर चलवा कर गिरवा दिया। इसी दौरान नफीस ने बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया। लेकिन अवैध कब्जे के मामले में उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी।
राजस्व लेखपाल मदन लाल ने कॉलोनाइजर नफीस अहमद अंसारी और उसके सहयोगी मोहल्ला सिविल लाइंस निवासी अहमद नबी, मोहम्मद एजाज, गोपाल कुमार गोपी, सत्येंद्र कौर, हरविंदर सिंह, रविंदर वीर सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, कूट रचित दस्तावेज तैयार करना, सबूतों से छेड़छाड़ की रिपोर्ट सदर कोतवाली में दर्ज कराई थी। इसकी सुनवाई सीजेएम न्यायालय में चल रही है। विवेचक ने जांच के दौरान नफीस अहमद के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
अन्य आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य न मिलने पर उनके नाम निकाल दिए। कॉलोनाइजर नफीस ने उच्च न्यायालय की शरण ली। उच्च न्यायालय ने कार्रवाई पर स्टे दे दिया। आदेश की समयावधि पूरी होने पर सीजेएम न्यायालय के समन पर मंगलवार को नफीस न्यायालय के समक्ष पेश हुआ और जमानत अर्जी दाखिल की। सुनवाई के बाद न्यायालय ने जमानत अर्जी खारिज कर कॉलोनाइजर और सपा नेता को जेल भेजने के आदेश दे दिए। इसके बाद अदालत से कड़ी सुरक्षा में नफीस को जेल भेज दिया गया।