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आबादी से बनाई दूरी तो ढाई गुना हो गई गिद्धों की संख्या

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पीटीआर के जंगल में पहुंचे गिद्ध। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। विलुप्त हो रहे गिद्धों ने आबादी से दूर जंगलों में अपना आशियाना बनाया तो प्रकृति ने उनकी सुरक्षा भी की और उनको फलने-फूलने का मौका भी दिया। अपने वजूद के लिए संघर्ष करते गिद्धों का कुनबा पिछले एक साल में तेजी से बढ़ा है। शनिवार को बराही रेंज में पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) की ओर से कराए गए सर्वे में संतोषजनक आंकड़े सामने आए हैं। गिद्धों की संख्या बढ़कर अब 248 हो गई है, जो पिछले सर्वे के मुकाबले दो गुनी है।
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तराई के जिले में एक वक्त था जब गिद्धों की तादात हजारों में होती थी, लेकिन जानवरों को दी जाने वाली डाइक्लोफेनिक दवा गिद्धों के लिए काल साबित हुई। मृत जानवरों के मांस खाकर गिद्धों में दवा का असर पहुंचने से उनकी मौतें होने लगी। जिले में गिद्ध लगभग विलुप्त होने की कगार पर थे। पीटीआर में गिद्धों के संरक्षण पर जोर दिया गया। गिनती के बचे गिद्धों ने भी आबादी से दूर जंगलों में अपना ठिकाना बनाया तो उनकी संख्या में तेेजी से इजाफा हुआ।
शनिवार को बराही रेंज की फैजुल्लागंज, सिमरा और हरीपुर रेंज के धनारा वन क्षेत्र में तीन टीमें लगाकर गिद्धों का सर्वे कराया गया। सुबह छह बजे से दोपहर तक टीम के बारह सदस्यों ने सर्वे किया। जो आंकड़े सामने आए वो बेहतर हैं। तीनों बीटों में 217 वयस्क और 31 बच्चे मिले। कुल 248 गिद्ध मिले हैं। पिछले साल कराए गए सर्वे में संख्या सौ के आसपास थी। यानी एक साल में गिद्धों की संख्या में दो गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। वन विभाग के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में गिद्धों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
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बराही रेंज की फैजुल्लागंज, सिमरा और हरीपुर रेंज के धनारा वन क्षेत्र में तीन टीमें लगाकर गिद्धों का सर्वे कराया गया। कुल 248 गिद्ध मिले हैं, जिसमें 217 वयस्क और 31 बच्चे हैं। पीटीआर में गिद्धों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। उम्मीद है कि पीटीआर में संरक्षण पाकर इनकी संख्या और तेजी से बढ़ेेगी। -नवीन खंडेलवाल, उप निदेशक पीटीआर
गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी, प्रर्यावरण के लिए इनका संरक्षण बेहद जरूरी
पीलीभीत। केंद्रीय विद्यालय में नेचर क्लब और समाधान विकास समिति विपनेट क्लब की ओर से अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने विद्यार्थियों को बताया कि गिद्ध प्रकृति के सफाई कर्मी हैं। उनका संरक्षण बेहद जरूरी है। प्राचार्य गंगा प्रसाद आर्य ने कहा कि पर्यावरण के लिए गिद्ध भी अहम भूमिका निभाते हैं। रिसोर्स पर्सन लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि गिद्धों के आवास व घोंसले बनाने के सुरक्षित स्थलों और पेड़ों का संरक्षण किया जाना चाहिए। नेचर क्लब के प्रभारी मुनेंद्र पाल गंगवार ने गिद्धों को लेकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की।
जसप्रीत सिंह और अवनेंद्र प्रताप सिंह विजेता रहे। पहेली, चित्रकला व स्लोगन प्रतियोगिता में प्राची और देव लोधी विजेता रहे। वन विभाग के रेंजर देव ऋषि गंगवार ने सम्मानित किया। प्रतियोगिताओं में प्रिया, भूमि, पवन, श्रद्धा, हर्षिता राज, प्रार्थना, सृष्टि, सिद्धेश, आर्निक, साक्षी देवल, अंशिका देवल, मोहित पांडे, संध्या सक्सेना, शोभित, आकृति, सोनम, नेहा, देव, कुनाल, विष्णु आदि ने हिस्सा लिया। प्रभात कुमार, मनदीप, पम्मी भारती, अभिषेक आदि मौजूद रहे। संवाद
लोगों को भी होना होगा जागरूक
गिद्ध दिवस के मौके पर फैजुल्लागंज के कंपोजिट विद्यालय में विचार गोष्ठी हुई। विशेषज्ञों ने गिद्धों से जुड़ी जानकारी साझा की। कहा जंगल में सुरक्षा मिलने से गिद्धों की संख्या बढ़ी है। लोग जागरूक हों तो गिद्धों को और बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सकता है। वर्ल्ड वाइल्ड फंड के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने कहा कि लोग मृत पशुओं को जंगल के किनारे न फेंके। युवा भी जागरूक हों। दो सौ से ज्यादा विद्यार्थियों ने गोष्ठी में हिस्सा लिया। पीटीआर डीडी नवीन खंडेलवाल, बराही रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी अरुण मोहन श्रीवास्तव और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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