पीलीभीत। बारिश शुरू होते ही जिले में हेपेटाइटिस ए और मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। जिले में मलेरिया से पीड़ितों की संख्या 250 तक पहुंच गई है, इसमें 220 से अधिक मरीज बिलसंडा क्षेत्र के ही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के दवा के छिड़काव और जांचें कराए जाने के दावों की पोल खुल गई है।
एक माह पूर्व हुई लगातार तीन दिन की बारिश से जगह-जगह जलभराव हो गया। खाली प्लाॅटों, सड़कों के किनारे और खेतों में भी पानी भरा रहा। इसके बाद शारदा और देवहा नदी के उफनाने से पीलीभीत, बीसलपुर और पूरनपुर में बाढ़ की स्थिति बन गई। जिसकी वजह से बाढ़ का पानी आबादी में भी घुस गया।
बाढ़ का पानी कई दिनों तक नहीं निकला। लंबे समय तक जलभराव की स्थिति रहने और दवाओं का छिड़काव सही ढंग से नहीं होने की वजह से जल जनित बीमारियों की आशंका बढ़ गई और मच्छर पनपने लगे। अब इसका असर देखने को मिल रहा है। जिले में 250 और सिर्फ बिलसंडा ब्लॉक में ही 220 से अधिक मलेरिया के मरीज सामने आ चुके हैं।
वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चंदिया हजारा में अब तक 19 मरीज मलेरिया से पीड़ित पाए गए हैं। हिपेटाइटिस ए के मरीजों की संख्या करीब 21 पहुंच गई है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका और क्षेत्र पंचायतों की ओर से खानापूर्ति के लिए दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।
बिलसंडा में मरीजों की संख्या सर्वाधिक है। इसका कारण है कि यहां के लोग अन्य जिलों में काम करने जाते हैं। वहां से बीमार होने पर लौट आते हैं और जब जांच की जाती है तो पता चलता है कि मलेरिया है। विभाग की ओर से नियमित रूप से दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही जागरूक भी किया जा रहा है।
-डॉ. आलोक कुमार शर्मा, सीएमओ