पूरनपुर क्षेत्र के गांव राहुल नगर में भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीण।स्रोत: प्रदर्शनकारी
पूरनपुर। धनाराघाट से खिरकिया बरगदिया तक पक्का तटबंध बनाने सहित तीन मांगों को लेकर भाकपा (माले) की भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। रविवार को दूसरे दिन क्रमिक भूख हड़ताल पर प्रहलाद, अंशुमान राय, आशीष राय, श्रवण भारती, शिवा कुमार, गणेश भारती, अफजाल अंसारी, महताब, सन्नी यादव, विनोद बैठे।
धरना स्थल पर हुई सभा में भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी सदस्य कृष्णा अधिकारी ने कहा कि आजादी के बाद सरकार ने 1960 और 1970 के दशकों में पूर्वांंचल के खेत मजदूरों और बंगलाभाषी विस्थापित परिवारों को लाकर क्षेत्र के दुर्गम और जंगली क्षेत्र में बसाया था।
कृषि करने को पट्टे की जमीन दी थी। कड़ी मेहनत के बाद लोगों ने जमीन को उपजाऊ बनाया। डबल इंजन की सरकार क्षेत्र को बाढ़ और कटान के हवाले कर और वन विभाग की जमीन का हवाला देकर उजाड़ने की कोशिश में लगी है। सालों से पूरा क्षेत्र बाढ़ और कटान की चपेट में है। सैकड़ों एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। हर साल सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसलें नष्ट हो जाती है।
बावजूद इसके सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चंदिया हजारा में पिछले साल चले आंदोलन करने वालों के साथ सरकार ने धोखा किया। करोड़ों रुपये की लागत से बना तटबंध बाढ़ का एक झोंका तक नहीं झेल सका। बाढ़ ने चंदिया हजारा, मजदूर बस्ती, राहुल नगर और खिरकिया बरगदिया में भयानक तबाही मचाई।
स्थायी तटबंध नहीं बनाया जा रहा है। अगर अभी से बचाव के कार्य नहीं हुए तब अगले साल इन गांवों का अस्तित्व संकट में आ जाएगा। कहा कि आंदोलन गांव और क्षेत्र के अस्तित्व को बचाने के लिए है आंदोलन को और भी बड़ा किया जाएगा। सभा में शम्स विकास ने भी विचार रखे। संचालन देवशीष राय ने किया।