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बेपरवाह तंत्रः तीन दिन तक तड़पती रही किशोरी, कोई पूछने तक नहीं पहुंचा

सार

दुष्कर्म के बाद जलाई गई युवती तीन दिन तक अस्पताल में तड़पती रही।घटना वाले दिन ही परिजन झुलसी किशोरी को पहले पूरनपुर सीएचसी ले गए।तहसीलदार को खुद या फिर किसी अधिकारी को भेजकर तत्काल किशोरी के बयान दर्ज कराने थे।
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किशोरी का शव पहुंचने के साथ ही गांव में पहुंचे अफसर।। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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विस्तार
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पीलीभीत। दुष्कर्म के बाद जलाई गई युवती तीन दिन तक अस्पताल में तड़पती रही। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पीड़ित के पास तक नहीं पहुंचे। सात सितंबर को घटना के बाद ही मामला सभी के संज्ञान में थी। प्रशासन तब जागा, जब 10 सितंबर को किशोरी ने बयान दिया कि दुष्कर्म के बाद उसे जलाया गया।
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घटना वाले दिन ही परिजन झुलसी किशोरी को पहले पूरनपुर सीएचसी ले गए। हालत गंभीर देख डॉक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में आने के बाद डॉक्टरों ने मेमो कोतवाली पुलिस को भेजा। इंस्पेक्टर कोतवाली नरेश त्यागी ने बताया कि 6.15 बजे उनके पास मेमो आया। उन्होंने दस मिनट के अंदर इसे 6.25 बजे तहसीलदार के यहां रिसीव करा दिया। तहसीलदार को खुद या फिर किसी अधिकारी को भेजकर तत्काल किशोरी के बयान दर्ज कराने थे। लेकिन लापरवाही के चलते तीन दिन तक किसी ने सुध नहीं ली।
ऐसे में यदि किशोरी को कुछ हो जाता तो घटना उजागर ही नहीं हो पाती। चौथे दिन 10 सितंबर को जब किशोरी को होश आया और उसने दुष्कर्म की बात बताई, तब पुलिस-प्रशासन में खलबली मची। एसडीएम ने आकर बयान दर्ज किए। फिर रिपोर्ट दर्ज हुई। तहसीलदार सदर राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि मेमो उनके पास नहीं आया। आठ और नौ सितंबर को वह लखनऊ गए थे। सवाल यह है कि तहसीलदार के यहां मेमो भेजे जाने के बाद भी अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि आखिर मेमो गया कहां।
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10 सितंबर को पुलिस की तरफ से सूचना मिली थी। इसके बाद अस्पताल जाकर किशोरी के बयान दर्ज किए थे। मेमो कहां गया इस संबंध में जानकारी करेंगे। - योगेश गौड़, एसडीएम सदर
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