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Pilibhit News: पेड़ों को बीमार बताकर उजाड़ दिया बाग, अनुमति पर अफसरों की भूमिका संदिग्ध

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बाग में जांच करने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट व डीएफओ । संवाद
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पीलीभीत। निरंजनकुंज में हरे-भरे आम के बाग के कटान की अनुमति पूर्व डीएफओ की ओर से बिना सोचे-समझे उद्यान विभाग की रिपोर्ट पर दी गई थी। अफसरों ने जब मौके पर जाकर जांच की तो रोगग्रस्त एक-दो ही पेड़ मिले। ऐसे में दोनों विभागों की सांठगांठ का साफ पता चल गया। अब जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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सामाजिक वानिकी के पूर्व डीएफओ संजीव कुमार की अनुमति और उद्यान विभाग की रिपोर्ट पर कुछ लोगों ने निरंजनकुंज कॉलोनी में हरे-भरे आम के बाग का मंगलवार की रात को कटान शुरू कर दिया गया था। बुधवार को मामला जब अधिकारियों के संज्ञान में आया तो इसकी जांच शुरू करा दी गई।
डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार सिंह और डीएफओ पीटीआर नवीन खंडेलवाल को जांच सौंपी थी। दोनों अधिकारियों से दो दिनों में रिपोर्ट देने के लिए कहा था। शनिवार को सिटी मजिस्ट्रेट ने डीएफओ के साथ कटान स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया। काटे गए पेड़ को जब देखा गया तो पेड़ रोग ग्रस्त नहीं मिले।
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कलमी और देसी आम के पेड़ की भी पहचान कराई गई। मौके पर मौजूद लेखपाल से जमीन के बाबत मानचित्र दिखाया। प्रथम दृष्टया पाया गया कि पूर्व डीएफओ संजीव कुमार और उद्यान अधिकारी ने तथ्यों को छिपाकर रिपोर्ट देकर अनुमति दी है। पेड़ों की जांच भी नहीं कराई गई। जांच के दौरान डीएफओ ने मौके पर काटे गए पेड़ों की माप कराई। अब स्थलीय और अभिलेखीय जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसे डीएम को दिया जाएगा। मौके पर मौजूद डिप्टी रेंजर शेरसिंह से जब पूछा गया तो बताया कि उनको अनुमति की जानकारी ही नहीं थी।


हो सकती है आरोपी अधिकारियों पर रिपोर्ट दर्ज
इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार खुले तौर पर उजागर हो चुका है। उद्यान विभाग के इंस्पेक्टर व पूर्व डीएफओ की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध है। सिटी मजिस्ट्रेट ने मौजूदा डीएफओ से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को लेकर चर्चा की। मौके पर ही मौजूद लेखपाल और विनियमित क्षेत्र के जेई को तहरीर देने के लिए भी कहा गया है। यही नहीं वक्फ बोर्ड की ओर से भी कार्रवाई करने की बात कही गई है। आशंका जताई जा रही है कि जांच रिपोर्ट देने के बाद इस मामले में आरोपियों पर एफआईआर कराई जा सकती है।


जमीन को लेकर भी फंस गया पेच
एक दिन पहले वक्फ बोर्ड ने डीएम को अपनी रिपोर्ट दी थी। इसमें कहा गया था कि जहां पर पेड़ काटे गए हैं वह जमीन वक्फ की नहीं है। इस पर डीएम ने नाराजगी भी जताई थी। शनिवार को जांच के दौरान अधिकारी इस रिपोर्ट पर संतुष्ट नहीं दिखे। ऐसे में माना जा रहा है कि इस विभाग की जांच भी संदेह के दायरे में है।


जांच पड़ताल में कई तरह की खामियां सामने आईं हैं। ऐसा लग रहा है कि बिना सोचे और देखे ही बाग के कटान की अनुमति दे दी गई। रिपोर्ट बनाकर जिलाधिकारी को दी जा रही है।- सुनील कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट



कब्रिस्तान से कट गए पेड़, किसी को जानकारी नहीं



बरखेड़ा। ग्राम आमखेड़ा में रातों-रात कब्रिस्तान के लगभग 13 पेड़ काट दिए गए। इसमें आम, कटहल, पॉपुलर और पाकड़ शामिल है। इन पेड़ों को बिना किसी अनुमति के आपसी बंदरबांट कर काटे जाने की बात कही जा रही है। पेड़ों की कुछ लकड़ी वहां से किसी अन्य जगह पहुंचा दी गई है। शेष लकड़ी अब भी कब्रिस्तान में पड़ी है।



प्रधान शाहिद अली से जब जानकारी की गई तो बताया कि पेड़ काटने की जानकारी उनको नहीं हैं। वन विभाग के अनुज जोशी ने भी बताया कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। न ही उनसे किसी भी पेड़ का मूल्यांकन ही कराया गया है। ग्रामीणों ने इस मामले में डीएफओ को शिकायती पत्र भेजकर जांच की मांग की है। संवाद

बाग में जांच करने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट व डीएफओ । संवाद

बाग में जांच करने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट व डीएफओ । संवाद

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