टाइगर रिजर्व बनने के बाद बाघों के संघर्ष में शावकों के मरने की यह दूसरी घटना है। इससे पूर्व अक्तूबर 2014 में महोफ रेंज और उत्तराखंड की सुरई रेंज के बार्डर पर बाघ ने व्यस्क शावक को मार डाला था। अब लगभग ढाई साल बाद एक फिर आपसी संघर्ष में दो शावकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। नौ जून 2014 को जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। टाइगर रिजर्व बनने के करीब पांच बाद उत्तराखंड की सुरई रेंज की सीमा से सटे महोफ रेंज के कंपार्टमेंट 105 में व्यस्क शावक का शव मिला था। सूचना पर पहुंचे वनाधिकारियों को बाघों के संघर्ष के निशान और खून मिला था। साथ ही मारे गए शावक को काफी दूर तक घसीटने के निशान भी मिले थे। इस घटना के करीब ढाई साल बाद एक फिर बाघों के संघर्ष का मामला सामने आया है। बुधवार को सुबह करीब नौ बजे वन विभाग की टीम को माला रेंज के कंपार्टमेट 120ए में बाघों में संघर्ष होते दिखा। प्रारंभ में वनकर्मी इसे साधारण घटना मानकर आगे बढ़ने लगे लेकिन बाघ के मुंह पर खून लगा देखा उन्हें आशंका हुई। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को सूचना दी। जिसके बाद घटना का खुलासा हो सका।