पीलीभीत। बेहतर सुविधा देने के दावों के बीच रोडवेज बस अड्डे की दुर्दशा यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। जर्जर भवन के अलावा परिसर में हर तरफ जलभराव और कीचड़ की स्थिति होने के साथ बैठने के लिए सिर्फ दो सीमेंट की बेंच हैं। वहीं गर्मी से राहत के इंतजाम भी नाकाफी है। इससे यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है।
पीलीभीत रोडवेज बस अड्डे से करीब 110 बसों का संचालन होता है। दिल्ली, लखनऊ, उत्तराखंड, लखनऊ समेत अन्य मार्गों की बसों का दिनभर यहां आवागमन होता है। बस अड्डे का दायरा काफी कम है। भवन भी पुराना हो चुका है। जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। भवन के जर्जर होने के साथ अन्य व्यवस्थाएं भी गड़बड़ाई हुई हैं।
बस अड्डे पर घुसते ही जलभराव की स्थिति देखी जा सकती है। मुश्किल के बीच यात्री पहुंचते भी हैं तो उन्हें बैठने तक की सही व्यवस्था नहीं मिलती। हालनुमा भवन में महज दो सीमेंट की बेंच लगाई गई हैं। वहीं गर्मी से निजात दिलाने के लिए दो पंखे लगाए गए हैं, जो पुराने होने के चलते हवा ही नहीं फेकते।
इसके अलावा मुख्य भवन को जाने के लिए भी जलभराव और कीचड़ से गुजरना पड़ता है। जिससे गिरने का खतरा भी बना रहता है।
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यात्रियों के अलावा स्टाफ भी परेशान
रोडवेज अड्डे पर फैली अव्यवस्था से यात्रियों के साथ स्टाफ भी परेशान हैं। मुख्य भवन में टिनशेड पड़ा होने से गर्मी में स्थिति बिगड़ जाती है। बचाव के लिए सिर्फ पंखे ही लगाए गए हैं। ऐसे में दिनभर यात्री और स्टाफ के लोग गर्मी से जूझते रहते हैं। अफसरों का कहना है कि नए रोडवेज अड्डे के निर्माण को लेकर प्रक्रिया चल रही है।
रोडवेज अड्डे की व्यवस्थाओं को सही करने के प्रयास किए जाते हैं। नए अड्डे के निर्माण को लेकर प्रक्रिया चल रही है। नया बस अड्डा बनने के बाद ही व्यवस्थाओं को पुरी तरह दुरुस्त किया जा सकेगा।
- पवन कुमार श्रीवास्तव, एआरएम