पीलीभीत। जंगल में नियमित गश्त के दावों के बीच हरीपुर रेंज में भालू के शिशु का शव तीन दिन तक पड़ा रहने की बात सामने आई। जानकारी होने के पर शव का पोस्टमार्टम कराया और दफन कर दिया गया। बताया जा रहा है कि शिशु एक माह का था। स्थिति को परखने के लिए कैमरे लगाकर निगरानी करने का दावा किया जा रहा है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का जंगल पांच वन रेंजों में फैला हुआ है। हरीपुर रेंज अवैध गतिविधियों के मामले में पूर्व में सुर्खियों में भी रही है। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विभाग की ओर से नियमित गश्त का दावा किया जाता है। जंगल सीमा के अन्य वन्यजीवों की चहलकदमी वाले इलाके पर भी नजर रखी जाती है, लेकिन हरीपुर रेंज में सोमवार को भालू के शिशु का शव मिलने के बाद गश्त पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि शव तीन दिन पुराना था। विभाग को इसकी जानकारी नहीं लग सकी। सोमवार को जब जानकारी लगी तो आनन-फानन में शव का पोस्टमार्टम कराकर दफन करवा दिया गया। अब भालू और उसके अन्य शावकों की गतिविधियों को परखने के लिए कैमरा ट्रैप लगवाए गए हैं। रेंज की टीम के साथ विभागीय बायोलाॅजिस्ट को भी सक्रियता बरतने के लिए लगाया गया है। डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि मौत का कारण निमोनिया से होना पाया गया।
पंडरी गांव में देखा गया बाघ
न्यूरिया। गांव पंडरी में तीन दिन से बाघ की चहलकदमी से ग्रामीणों में दहशत है। किसान खेतों पर जाने से डर रहे हैं।
मंगलवार सुबह से ही बाघ श्यामविहारी के सरसों के खेत में बैठा रहा। पंडरी निवासी अभिषेक और रिंकू खेत देखने गये तो बाल-बाल बचे। बाघ देख डरकर गांव की तरफ भागे। पता चला तो जब ग्रामीणों ने टाइगर रिजर्व के डिप्टी रेंजर सामाजिक वानिकी के शेर सिंह को फोन किया। अधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वासन तो दिया, लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। पूरे दिन ग्रामीण टाइगर रिजर्व की टीम का इंतजार करते रहे। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। हरकिशनापुर के ग्रामीण भी बाघ की चहलकदमी से दहशत में हैं। बताते है कि ग्राम पंडरी से महोफ जंगल तीन किलोमीटर दूर है। तालाब की वजह से बाघ यहां आ रहा है। संवाद
शावकों के साथ तेंदुआ घूमने की सूचना पर लगाए कैमरे
पूरनपुर। हरीपुर जंगल के बाहर खेत में एक तेंदुआ दो शावकों के साथ घूमते दिखने की सूचना पर निगरानी को टीम लगाई गई है। दो कैमरे भी लगाए गए हैं, ताकि उनकी फोटो कैमरों में कैद हो सके। वन विभाग की टीम को जांच में तेंदुआ के पगचिह्न मिले हैं।
हरीपुर जंगल से सटे गांव नजीरगंज के समीप खेत में मादा तेंदुआ को अपने दो शावकों के साथ घूमते हुए लोगों ने देखा था। इसकी जानकारी रेंज के अफसरों को दी गई। रेंजर वीरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि सूचना पर तेंदुआ और उसके शावकों की निगरानी को टीम लगाई गई। टीम को तेंदुआ और उसके शावक तो नहीं मिले, लेकिन पदचिह्न मिले हैं। संवाद